पर्यावरण विभाग कर सकता गंगा बचाने का काम

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चित्रकूट- मां गंगा को बचाने के लिए यूपी सरकार द्वारा कमेटी में सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति करना और शहरी विकास मंत्रालय द्वारा परियोजना को पूरा कराने का निर्णय अव्यवहारिक है। इससे गंगा का कोई भला होने वाला नहीं है। शहरी विकास मंत्रालय का काम तो शहरों, नगरों व कस्बों का विकास करना है। गंगा को बचाने का काम पर्यावरण विभाग ही कर सकता है।

पर्यावरणविद् डा. गुरु दयाल अग्रवाल ने प्रमोदवन स्थित आवास में वार्ता करते हुए कही। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में 5 अक्टूबर को आयोजित कमेटी की पहली ही बैठक में सभी लोगों ने गंगा नदी पर बांध को बनाये जाने का विरोध किया। प्रधानमंत्री ने भी दो महीने काम बंद रखने का निर्णय लेकर पर्यावरण और ऊर्जा मंत्रालय से सुझाव मांगे हैं। पांच प्रदेशों से होकर बहने वाली गंगा को बचाने के लिए उप्र, झारखंड और पश्चिम बंगाल ने जहां समितियों का गठन किया पर अभी तक उत्तराखंड और बिहार ने कोई काम ही नहीं किया। यूपी सरकार ने अव्यवहारिक फैसला लेकर समिति में 26 सरकारी सदस्यों को बैठा दिया, जबकि बाहर के किसी भी पर्यावरणविद को मनोनीत नहीं किया। उन्होंने कहा कि पहली बैठक में गंगा नदी में बांधों के निर्माण व समितियों के संचालन के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण निर्णय हुए। आगामी बैठक में गंगा बेसिन अथारिटी के अंतर्गत अन्य सभी सहायक नदियों को लिया जायेगा। उन्होंने कहा धार्मिक दृष्टि से मंदाकिनी का भी विशेष महत्व है। इसको बचाना आवश्यक है।