पद्मश्री डॉ. धारकर का निधन

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ग्वालियर उत्तर भारत के विख्यात न्यूरोसर्जन व मप्र के न्यूरोसर्जरी के पितामह, पद्मश्री डॉ. आरएस धारकर का शनिवार को तड़के जयपुर में निधन हो गया। वे 88 वर्ष के थे। उनके निधन को चिकित्सा जगत में अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

ग्वालियर में जन्मे डॉ. धारकर के पिता सिंधिया स्टेट में जीवाजीराव सिंधिया के पर्सनल सेकेटरी थे। 1946 में आगरा विश्वविद्यालय में एमबीबीएस की उपाधि पाने के बाद डॉ. धारकर ग्वालियर आ गए। जयारोग्य अस्पताल में उन्होंने नौकरी ज्वाइन कर ली। 1946 में पिता का देहांत हो गया। 1954 में उन्होंने डॉ. राव के अण्डर में मास्टर ऑफ सर्जरी(एमएस) की उपाधि प्राप्त की। वे प्रदेश के पहले डॉक्टर थे जिन्होंने न्यूरोसर्जरी में एमएस की उपाधि प्राप्त की। विश्वविख्यात न्यूरोसर्जन डॉ. जैकब सेण्डी से वर्ष 1956 से 1958 तक वेल्लोर में उन्होंने ट्रेनिंग ली।

गजराराजा मेडिकल कालेज एवं जयारोग्य अस्पताल(जेएएच ग्रुप) में विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं देने के दौरान वर्ष 1976 में उन्होंने जेएएच में न्यूरोसर्जरी विभाग की स्थापना की। मप्र ही नहीं बल्कि उत्तर भारत का यह पहला न्यूरोसर्जरी विभाग था। वर्ष 1980 में वे सेवानिवृत्त हो गए। उनके एक बेटा व तीन बेटियां हैं। बेटा डॉ. सुभाष धारकर दो साल पहले ही एसएमएस हास्पिटल, जयपुर से सेवानिवृत्त हुए हैं। पद्मश्री डॉ. धारकर अपने बेटे के साथ ही रहते थे।

जेएएच के पूर्व संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक डॉ. एसएम तिवारी के अनुसार, न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में डॉ. धारकर की ख्याति का अंदाजा उनके कार्य से लगाया जा सकता है। समाजवादी नेता डॉ. राममनोहर लोहिया सहित कई प्रमुख हस्तियों के इलाज के लिए उन्हें विशेष विमान से दिल्ली, भोपाल सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में ले जाया जाता था। उनकी मानव सेवा को देखते हुए ही केन्द्र सरकार ने वर्ष 1976 में उन्हें चिकित्सा क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान से नवाजा था।

डॉ. धारकर जरूरत पड़ने पर साइकिल से भी मरीज को देखने अस्पताल पहुंच जाते थे। दोपहर की गर्मी हो अथवा रात, मरीज की सेवा उनकी प्राथमिकता में शामिल था। जीआरएमसी की डीन डॉ. शैला सप्रे के अनुसार, डॉ. धारकर लौहपुरुष थे। वे ईमानदारी की एक मिसाल थे। जीआरएमसी के डॉ. आरएलएस सेंगर के अनुसार डॉ. धारकर सादा जीवन जीते थे। चिकित्सीय सलाह के लिए हर साथी की मदद के लिए वे हरदम तैयार रहते थे।

डॉ. धारकर के निधन पर जीआरएमसी में शनिवार को शोक सभा का आयोजन किया गया। डॉ. जेएस छाबड़ा, डॉ. अमृता मेहरोत्रा व अन्य ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला। शोक सभा में जेएएच के संयुक्त संचालक एवं आधीक्षक डॉ. पीसी महाजन, डॉ. एलपी वर्मा, डॉ. एसएम तिवारी, डॉ. एसएन अयंगर, डॉ. अशोक मिश्रा, डॉ. कमल भदौरिया, डॉ. ओएन कौल भी शामिल थे।

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