पत्रकारिता का अर्थ है शब्द : अरविंद कुमार विष्ट,

0
501

IMG_20160529_160708_1

**डेस्क पर काम करने वालों को भी मिले पेंशन का हक : गोस्वामी
** पीत पत्रकारिता से बचें : प्रियांशु
**प्रसार भारती को आजादी मिले : त्रिपाठी
** देश में राष्ट्रीय हिंदी पेपर का अभाव : सिद्दीकी

उरई। पत्रकारिता का अर्थ शब्द। मनुष्य प्राणी सुर और शब्द का सीधा संबंध ज्ञान से होता है इसलिए चिंतन जरूरी है। उक्त बात राज्य सूचना आयोग उप्र अरविंद कुमार बिष्ट ने आज श्रमजीवी यूनियन द्वारा आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विकास भवन में उपस्थित पत्रकारों एवं गणमान्य नागरिकों से कही।
उन्होंने कहा कि राज्य सूचना आयोग से पहले मैं पत्रकार था और टाइम्स आफ इंडिया में ब्यूरो चीफ की हैसियत से काम किया। कई बार बड़े कठिन क्षण आए। उन्होंने बताया कि पत्रकारिता में कोई बात अगर एक बार आ जाए तो उसको बार-बार नहीं दोहराना चाहिए। विदेशों में अगर एक न्यूज एक समय में चल गई तो दोबारा उसका बखान नहीं होता है लेकिन बदलते समय में इस हिंदुस्तान के अंदर एक न्यूज को कई बार रिपीट करते हैं। इससे पत्रकारिता का जो एक मकसद है वह धूमिल हो रहा है। आखिरकार ऐसी कौन सी बात कहना चाहते हैं जो एक समय में पूरी नहीं हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारिता और सूचना आयोग होना दोनों ही एक अलग विषय हैं। जब दो पक्ष मेरे सामने आते हैं तो मुझे दोनों की ही सुनना पड़ती है। जरूरी नहीं है कि आप हमारी दलीलों से संतुष्ट हों और अगर किसी के खिलाफ में निर्णय होता है तो वह हाईकोर्ट में अपनी रिट 226 अनुच्छेद में दायर कर सकता है।

IMG_20160529_144538

IMG_20160529_125514

IMG_20160529_125539
इसके अलावा मान्यता प्राप्त समिति एनेक्सी के अध्यक्ष प्रियांशु मिश्रा ने कहा कि जो पेड न्यूज है यह दीमक की तरह पत्रकारिता जगत को चाटने में लगी हुई है अगर यह सिलसिला बंद नहीं हुआ तो पत्रकारों को आने वाले समय में कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो जर्नलिस्ट एक्ट 1955 है उसमें जो अधिकार पत्रकारों के लिए रखे गए हैं वह काफी नहीं हैं। पत्रकारों की सुरक्षा से लेकर उनको श्रम आदि शामिल होना चाहिए ताकि एक समय उपरांत वह कम से कम कुछ अपनी जिंदगी का अंश बचाकर बाकी बची हुई जिंदगी को उस श्रम से जिंदा रख सकेें। इस मौके पर श्रमजीवी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जनाब हाशिब सिद्दीकी ने कहा कि आज देश के अंदर कोई भी हिंदी पेपर राष्ट्रीय नहीं बन सका है जिसका मुख्य कारण कि बड़े-बड़े गु्रुपों ने पेपरों को हथिया लिया है और हर पेपर को क्षेत्रीय बना दिया है अगर राष्ट्रीय कोई न्यूज है तो कभी भी चैनल पर यह नाम नहीं आता है कि इसे फला राष्ट्रीय पेपर ने निकाला है जबकि विदेशों में अगर कोई घटना होती है तो उस पेपर का नाम अवश्य लिया जाता है कि इस पेपर में न्यूज प्रकाशित की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि धनाढ्य लोगों ने अब पत्रकारिता को भी व्यवसायिक बना दिया है और लोग अब इसे धंधा बनाने लगे हैं अगर जनता ऐसे पेपरों का विरोध करने लगे तो पेपर का स्तर सुधर सकता है। इस मौके पर बीबीसी लंदन के वरिष्ठ संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी ने कहा कि दूसरों के लिए आदर्श और अपने लिए समाज में उपेक्षा यह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सत्य सोने के पात्र में बंद रहता है और सत्य बोलने वाले को तरह-तरह की समस्याओं का सामना करने के लिए विवश होना पड़ता है। जागरण के पूर्व ब्यूरो चीफ शिवशंकर गोस्वामी ने कहा कि पैंसठ वर्ष पुरानी पत्रावली में पेंशन को शामिल किया गया है परंतु यह पेंशन सिर्फ लखनऊ में काम करने वाले पत्रकारों को ही मिलती है। इसका क्षेत्र बढ़ाने की आवश्यकता है जिसके लिए हर तहसील और मुख्यालय के पत्रकारों को आवाज उठाना पड़ेगी अगर आपके क्षेत्र में प्रदेश के मुख्यमंत्री आते हैं तो उनके सामने अपनी मांगें रखें। जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भिजवाएं। पत्रकारों की सुरक्षा का दायित्व भी जिला प्रशासन का है। वहीं श्रमजीवी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्याम बाबू ने पत्रकारों के सामने ïआने वाली समस्याओं पर अपने विचार रखे और उन्होंने कहा कि पत्रकारों को फर्जी संगठनों से दूर रहना चाहिए। इसके अलावा अपर जिलाधिकारी आनंद कुमार ने कहा कि पत्रकारिता एक मिशन है। यह तभी पूरा हो सकता है जब प्रत्यक्ष प्रमाण के साथ खबरें लिखी जाएं। अपर पुलिस अधीक्षक शकील अहमद ने कहा कि पत्रकार छोटी-छोटी घटनाओं को लिखते हैं। एक्सीडेंट भी लिखे जाते हैं। एक्सीडेंट किन कारणों से हुए अगर यह भी लिखा जाने लगे तो किसी हद तक लोगों को यह संदेश पहुंचेगा कि इन चीजों पर ध्यान रखा जाए तो घटनाक्रम रोका जा सकता है। उप जिलाधिकारी संजय सिंह ने कहा कि महाभारत में लोग अपने कर्तव्यों से बंधे हुए थे और अधिकार को लेकर दुर्योधन ने जो कार्य किया था उससे एक संदेश आम लोगों तक पहुंचा था। इसी प्रकार जो पीत पत्रकारिता शुरू हुई है उसमें अगर पत्रकार गहराई तक पहुंचकर सार निकालकर लाए तो कई मायनों में इस पत्रकारिता का मिशन पूरा हो सकता है। विनोद चतुर्वेदी ने कहा कि पत्रकारिता में ही नहीं नेताओं में या अन्य लोगों में भी गिरावट आई है। इसे रोकने की जरूरत है। डीआईजी नवनीत राणा ने कहा कि सूचना के लिए अंतिम स्थान तक पत्रकार को जाने की है जरूरत और पुलिस से पहले हमेशा पत्रकार पहुंचते हैं। इस मौके पर पूर्व आईईएस शंभू दयाल, विकास कुमार शर्मा अनिल शर्मा, मुकेश उदैनिया, राजीव अवस्थी, संदीप दुबे ने भी अपने विचार रखे। यह कार्यक्रम श्रमजीवी के जिलाध्यक्ष श्रीकांत शर्मा और जिला उपाध्यक्ष सौरभ पांडेय द्वारा आयोजित किया गया। इसका संचालन डा. अनीता सहगल ने किया।

NO COMMENTS