पति की दीर्घायु को रखा करवा चौथ का व्रत

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चित्रकूट-अपने पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनों ने करवा चौथ का व्रत रखा। शाम को चंद्रमा को अर्घ दे विधि विधान से पूजा पाठ कर पति द्वारा जल व फल ग्रहण कराने के बाद व्रत पूरा किया।

पुराणों में व्रत की महत्ता का उल्लेख है। किवदंती है कि सुहागिनों के करवा चौथ का व्रत रखने से पति की दीर्घायु व परिवार में संपन्नता आती है। पुराणों में कथा है कि प्राचीन समय में करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री थी। एक बार नदी में स्नान करते वक्त उसके पति को मगरमच्छ ने लील लिया। करवा ने अपने पतिव्रत शक्ति से मगर के पेट से पति को निकाल लिया। करवा के पतिव्रत के प्रभाव से पति जिंदा हो गये। करवा ने यमराज से पति की दीर्घायु का वरदान भी पा लिया। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन करवाचौथ का व्रत सुहागिनें रखती हैं। इस व्रत में चंद्रमा की पूजा कर सुहागिनें अपने प्रियतम की दीर्घायु की कामना करती हैं। महिलाओं ने विविध प्रकार से साज श्रृंगार कर हाथों में मेहंदी रचायी। कहते हैं कि मेहंदी का रंग जितना चढ़ेगा उतनी ही घर में खुशहाली आयेगी।