न चेते तो विज्ञान बन जायेगा अभिशाप

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विज्ञान के नित नये होने वाले अविष्कारों से जहां तरक्की के नये द्वार खुल रहे हैं वहीं यह विनाश का कारण भी है।

विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस के अवसर पर गुरुवार को राजकीय महिला महाविद्यालय सभागार में प्रवास सोसाइटी द्वारा एक दिवसीय पर्यावरणीय मंत्रणा का आयोजन किया गया। इस मौके पर बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा स्वेच्छा द्विवेदी ने आधुनिकीकरण एवं वायु प्रदूषण के चलते कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि का होना प्रमुख कारण बताया। बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा रजनी यादव ने कहा कि पृथ्वी के संरक्षण में सभी गैसों की समानता और संतुलन आवश्यक है। जैसे नाइट्रोजन, मेथेन, कार्बन इनमें से किसी एक का बढ़ जाना ग्लोबल वार्मिग के खतरे को बढ़ा सकता है। कु. प्रज्ञा मिश्रा बीएससी द्वितीय वर्ष ने विज्ञान को अविष्कार की जननी और विनाश का सूचक दोनों ही बताया। मिश्रा ने कहा तकनीकीकरण के द्वारा प्राकृतिक और जैविक संसाधनों का मनुष्य के हित में प्रयोग करना प्रदूषण और पर्यावरण को सुरक्षित रख सकता है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि समाज कल्याण अधिकारी एसजे फारूकी ने युवा छात्राओं के प्रयास को भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा श्रोत बताया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. लक्ष्मीकांत मिश्रा, समाजसेविका डॉ. आशा सिंह एवं प्रवास सोसाइटी के निदेशक आशीष सागर, डॉ. सबीहा रहमानी, नीरज शर्मा, जितेंद्र कुमार आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।

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