निषाद समाज ने मौरंग के पट्टे की माँग की

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हमीरपुर- जिले की नदियों के किनारे बारी लगाने वालों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर तहसील स्तर पर 5 वर्ष और 10 वर्ष का पट्टा दिये जाने की मांग की। प्रदर्शन कारियों का कहना था कि निर्धारित राजस्व शुल्क पर पट्टा दिया जाये। बैंक से ऋण दिलाया जाये और दैवी आपदाओं से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति भी दिलायी जाये।

जिले में यमुना, बेतवा समेत आधा दर्जन नदियों के किनारे मौरंग में गेहूं, चना के साथ जायद की सब्जियों की खेती करने वाले मेहनतकश लोग दबंगों के अत्याचार का शिकार होते हैं। वर्ष 1960 के बाद यहां मिट्टी की जगह मौरंग आने लगी। जिस पर सब्जी की खेती लोग करने लगे, मगर पिछले 15 सालों से मौरंग ठेकेदार व दबंग इन बारियों को उजाड़कर खनन करते हैं। जबकि एक बारी के लगाने में हजारों रुपये का खर्च आता है। निषाद समुदाय के लोग इस उत्पीड़न से आर्थिक तौर पर पूरी तरह से कंगाल हो जाते हैं और कभी यह लोग दैवी आपदा के शिकार होते हैं। ग्राम समाज व किसानों के खेतों के ऊपर पड़ी मौरंग खनन का पट्टा राज्य सरकार करती है, मगर इन लोगों की सुविधा का कोई ध्यान नहीं रखा जाता। जबकि यह मेहनतकश लोग सूदखोरों से ब्याज में पैसा लेकर सब्जी की खेती करते हैं और नुकसान होने पर दूसरे प्रदेशों में रोजी-रोटी के लिए पलायन को मजबूर होते हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार की मौरंग पर बारी लगाने का 5 व 10 वर्ष का पट्टा इच्छुक व्यक्ति को दिया जाये। बैंकों से ऋण दिलाया जाये, ताकि खाद, बीज, पानी की भरपाई हो सके। दैवी आपदाओं से क्षति होने पर मुआवजा भी दिलाया जाये।