नहीं सुलझा संपत्ति कर का मामला

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ग्वालियर. भवन स्वामियों से बढ़ी दर पर संपत्ति कर की वसूली का निर्णय फिलहाल नहीं हो सका है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने निगम आयुक्त के प्रस्ताव पर सवाल किए हैं। आयुक्त ने जवाब भेज दिया है पर मामला अभी भी सुलझा नहीं है।

वित्तीय वर्ष 2009-10 में संपत्ति कर में बढ़ोतरी का प्रस्ताव कलेक्टर के माध्यम से मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) के पास भेजा गया था। इस प्रस्ताव से सीईओ संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने तीन सवाल करते हुए जवाब भेजने को कहा। सीईओ ने पूछा कि क्या मेयर इन काउंसिल के निर्णय को महापौर द्वारा संशोधित किया जा सकता है? काउंसिल के निर्णय को लागू किए जाने में क्या विधिक कठिनाईयां आ रही हैं? प्रकरण निगम परिषद की बैठक में क्यों प्रस्तुत नहीं किया गया?सीईओ के इन सभी सवालों का जवाब निगम आयुक्त ने कलेक्टर के माध्यम से एक बार फिर भेजने की तैयारी कर ली है। आयुक्त ने तकनीकी दिक्कतें बताकर भेजे गए प्रस्ताव को स्वीकृति देने का आग्रह किया है। आचार संहिता के कारण संपत्ति कर संबंधी मामले में स्थानीय स्तर पर निर्णय नही हो सकता, इसी कारण प्रस्ताव सीईओ के पास भेजा गया था।

मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1956 की धारा 138 में प्रावधान है कि यदि 30 अप्रैल तक संपत्ति कर के निगम आयुक्त के नए प्रस्ताव को महापौर अनुमोदित नहीं करते हैं तो प्रस्ताव को निगम द्वारा स्वत: ही पूरी तरह के अंगीकृत कर लिया जाएगा। चूंकि 30 अप्रैल की मतदान तिथि नजदीक है और सीईओ चुनावी तैयारियों में व्यस्त रहेंगे, इसलिए लगभग तय है कि अब इस मामले में निगम आयुक्त को ही निर्णय लेना होगा।