नरेगा पर भी पड़ रहा असर

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झांसी। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना (नरेगा) की परियोजनाएं गांव में चल तो रही है, लेकिन इनकी सूचनाएं मुख्यालय तक नहीं पहुंच पा रही है। जो सरकारी कर्मचारी इस कार्य को अंजाम दे रहे थे, वे चुनाव में उलझ गए है।

बुन्देलखण्ड में पिछले पड़े सूखे ने ग्रामीणों की कमर तोड़ दी थी। उन्हें शहरों के लिए पलायन करने को मजबूर होना पड़ा था। यहां सूखे से निपटने के लिए लोगों को नरेगा से जोड़ा गया। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए पहले तो हर गांव में तालाब खुदवाए गए। इसमें हर व्यक्ति को काम नहीं मिल पाने की शिकायत पर अन्य परियोजनाएं वनीकरण, उद्यानीकरण, बंधी निर्माण, मत्स्य पालन, रेशम कीट पालन, औषधि का पौधारोपण समेत 11 परियोजनाओं को शुरू किया गया। वर्तमान में मण्डल के जनपद झांसी की 437 ग्राम पंचायतों, जालौन की 564 तथा ललितपुर की 340 ग्राम पंचायतों में तालाब का जीर्णोद्धार व नए तालाब का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। कितने लोगों को काम मिला इसकी प्रतिदिन की रिपोर्ट भेजी जाती है। इस कार्य को अंजाम ग्राम पंचायत विकास अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारी देते है। इधर लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से इनकी व्यस्तता बढ़ गई है। यही कारण है कि प्रतिदिन की सूचनाएं अपडेट नहीं हो पा रही है। ऐसे में मजदूरों को मिलने वाला काम प्रभावित हो रहा है।