नरेगा के तहत आए 37 करोड़ रुपए

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झांसी- राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना में धनराशि आड़े न आए इसको लेकर सरकार ने वित्तीय वर्ष में जनपद को 37 करोड़ से ज्यादा की धनराशि भेजी है। योजना के तहत काम करने वालों की संख्या में भी इजाफा कर दिया गया है।

काम के अभाव में ग्रामीण गांव छोड़कर बड़े शहरों की ओर पलायन न करे। इसके लिए गांव में ही नरेगा के तहत रोजगार मुहैया कराया जा रहा है। इसके बाद भी कई मजदूर वर्ग के लोग बड़े शहरों की ओर रुख कर रहे है। इस बात को बल रेलवे स्टेशन पर बढ़ रही ग्रामीणों की भीड़ से मिल रहा है। नरेगा के तहत केन्द्र सरकार द्वारा जारी की गई राशि में से जनपद को वित्तीय वर्ष के लिए 37.19 करोड़ रुपए दिए गए है। इसमें से 5 करोड़ रुपए वन विभाग को नरेगा के तहत होने वाले पौधारोपण और उनके रखरखाव के लिए दिए गए है। 3 करोड़ रुपए ग्राम पंचायतों को दिए गए है। जनपद में जॉब कार्ड धारकों की संख्या में भी इजाफा किया गया है। अब इनकी संख्या 1,19,713 हो गई है।

राष्ट्रीय रोजगार गारण्टी योजना को वर्ष 2007-08 में पूरे देश में लागू करने के अच्छे नतीजों के बाद अब योजना की खामियों को दूर करने तथा योजना पर सीधे नजर रखने के लिए आवश्यक सुधार किए जा रहे है। नई सरकार की गठन की प्रक्रिया के तुरन्त बाद इस योजना में संशोधन का काम कर लिया जाएगा। लोकसभा चुनाव में प्रदेश में नरेगा योजना में भ्रष्टाचार व गड़बड़ी के आरोप उछलने के बाद अब इस योजना पर केन्द्र सरकार सीधे अपनी निगरानी में लेने की योजना बना रही है। योजना का फीड बैक लेने के लिए ग्रामीण मंत्रालय में जानकारी मांगी है कि जिला स्तर पर कितने लोगों को 100 दिन का काम दिया गया है। योजना में प्रावधान है कि जॉब कार्ड बनने के बाद काम मंगाने पर लोगों को एक वर्ष में कम से कम 100 दिन का काम उपलब्ध कराया जाए। अधिनियम में साफ कहा गया है कि काम नहीं देने पर 10 दिन के भीतर बेरोजगारी भत्ता देना पड़ेगा। इस योजना में जॉब कार्ड धारकों व काम मिलने वालों में भारी असमानता के चलते जानकारी मांगी जा रही है कि जॉब कार्ड लेने के बाद भी लोग काम क्यों नहीं कर रहे है और आवेदन लेने की क्या प्रक्रिया है। यह आम शिकायत है कि प्रधान/ग्राम पंचायत सचिव लोगों के आवेदन ही नहीं लेते है और आवेदन लेने की पुष्टि की रसीद नहीं देते है। इसीलिए मंत्रालय ने जानकारी मांगी है कि अब तक कितने लोग जॉब कार्ड पा चुके है और कितनों ने रोजगार मांगा है।

विभागीय सूत्र बताते है कि इस योजना में अब 100 के स्थान पर 150 दिन का रोजगार दिए जाने की तैयारी की जा रही है। पर, इसके पहले केन्द्र सरकार इस योजना के पर्यवेक्षण को और गहराई से करना चाहती है। इसीलिए जिला स्तर पर अब केन्द्रीय टीमें दौरा कर योजना की जमीनी सच्चाई देखेंगी। जिला स्तर पर नरेगा की अदालतें लगाने की भी योजना है। इसके साथ ही राज्य के साथ जिला, तहसील व ब्लाक स्तर पर टास्क फोर्स गठित किया जाएगा। इस योजना में केन्द्र सरकार ने मिट्टी के कार्य व पक्के निर्माण के लिए मानक तय किए है। इन्हीं मानकों के आधार पर राज्य सरकार ने पिछले वर्ष एक दर्जन विभागों के कामों को भी इसमें शामिल कर लिया है। गांव में लोगों के बीच इस योजना की लोकप्रियता बढ़ने से इसे और मजबूती से लागू किया जाना है।