जमाना नहीं सुधरा तो अस्तित्व ढूढ़ोंगे

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चित्रकूट- ‘ले भाई दस साल और मंदाकिनी की फोटो, जमाना नहीं सुधरा तो अस्तित्व ढूढ़ोंगे, इस नदी का और जमाना तुम्हें माफ नही करेगा।’
वर्षो से अपनी धुन में मस्त रह भगवान की भक्ति में तल्लीन समाज को सही दिशा दिखाने वाले मुखर आशुकवि द्वारिकेश पटैरिया से जब मंदाकिनी प्रदूषण पर सवाल किया गया तो वे बिफर पड़े। कहा कि कोरी बयानबाजी ही मंदाकिनी प्रदूषण का मुख्य कारक है। जिस दिन नेताओं के साथ आम आदमी व समाजसेवी बयानबाजी बंद कर आत्म अनुशासन में लग जायेंगे मंदाकिनी पवित्र हो जायेगी।
उन्होंने कहा कि अभी तो शुरुआत है, परिवर्तनों का असर अब चित्रकूट की धरती पर भी दिखाई देने लगा है। कोरी बयानबाजी सभी को ले डूबेगी।
मंदाकिनी के जल में एक विशेष गुण पाया जाता है। अनुसुइया आश्रम से निकलने के बाद जल अर्जुन के पेड़ों से टकराकर आता है। प्राकृतिक रुप से इसमें अर्जुन के पेड़ का अश्क आ जाता है। पहले इस पानी को ह्दय रोग के लिये अत्यंत गुणकारी माना जाता था पर दस सालों से नदी में मल मूत्र के साथ प्रदूषण बढ़ने के बाद इसके औषधीय गुण खतम होने लगे। एक साल पहले जल निगम की कार्यप्रणाली की वजह से तो इसका जल अब पीने क्या नहाने लायक नही बचा। चित्रकूट में पिछले दो साल से गर्मी के मौसम में फैलने वाला पीलिया का जनक यही जल बताया जाता रहा है। उधर मंदाकिनी निकलने के स्थान अनूसुइया आश्रम से ही इसमें गंदगी को डाला जाना प्रारंभ कर दिया जाता है। कर्वी आते-आते तो गंदगी की पराकाष्ठा हो जाती है। अधिकारी तो अपना कर्तव्य भूले है और समाजसेवियों का हाल खराब है।