नगर निगम का गृहकर फंसा कानूनी पेंच में

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झांसी- नगर निगम का गृहकर कानूनी पेंच में फंस गया है। लोग अभी भी इसके कम होने की आस लगाए बैठे है। इसके उलट नगर निगम ने शिविर लगाकर वसूली शुरू कर दी है।

नगर निगम बोर्ड गठन से पहले वर्ष 02-03 में हुए गृहकर के सर्वे ने बखेड़ा खड़ा कर दिया है। सर्वे में लगाए गए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने मनमाने तरीके से गृहकर लगा दिया था। हालांकि बाद में इसकी सुनवाई के लिए एक कमेटी गठित की गई थी, जिसके समक्ष आपत्ति दर्ज कराने वालों का तो गृहकर कम कर दिया गया था, जो लोग सुनवाई नहीं करा सके थे, उन पर उतना ही कर निर्धारित कर दिया गया। सुनवाई न होने वालों की संख्या 40 फीसदी बतायी जाती है। इसके बाद नगर निगम के बोर्ड का गठन हुआ। यह मुद्दा बोर्ड की हर बैठक में उठा और हंगामा भी हुआ। निगम प्रशासन का हर बार एक ही जवाब रहा है कि सुनवाई का कई बार मौका दिए जाने के बाद भी जिन लोगों ने गृहकर कम नहीं कराया, उसके लिए कुछ नहीं किया जा सकता। साथ ही नियमावली का हवाला भी दिया। बोर्ड ने गृहकर कम करने का प्रस्ताव पारित कर शासन को भी भेजा, लेकिन उससे भी अभी तक कोई राहत नहीं मिली। गृहकर कम की आस लगाए लोगों में हड़कम्प उस समय मच गया है, जब नगर निगम ने गृहकर वसूली शिविर लगाना शुरू कर दिए।

कहने को गृहकर की अनियमितताओं को लेकर अधिवक्ता भानू सहाय ने कोर्ट में वाद भी दायर किया है, जो न्यायालय में विचाराधीन है। अधिवक्ता ने बताया कि धारा 177 के तहत 5 उप धाराएं है, जिसमें धार्मिक स्थल, विद्यालयों से गृहकर नहीं लिए जाने का प्रावधान है, बशर्ते उनमें व्यवसाय न हो रहा हो। इसके साथ ही 30 वर्ग मीटर भूखण्ड तथा 15 वर्ग मीटर के भवन कर के दायरे में नहीं आते है। इसके बाद भी सर्वे के दौरान सभी पर कर लगा दिया गया है। उन्होंने बताया कि झांसी ‘सी’ श्रेणी में दर्ज है और नगर निगम ने गृहकर ‘ए’ श्रेणी का लगाया है, जो नगर निगम अधिनियम 1959 का उल्लंघन है। महापौर डॉ. बी. लाल ने बताया कि गृहकर को कम करने के लिए तमाम प्रयास किए, लेकिन कानूनी पेंच फंसने के कारण सफलता नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि निगम ने जो स्वकर प्रणाली लागू की है, उसके अनुसार लोग गृहकर अदा करते है, तो वह पहले से कम पड़ेगा। गृहकर अधीक्षक हरीश वर्मा ने बताया कि शिविर में उतना ही गृहकर का भुगतान जमा किया जा रहा है, जितना निर्धारित है। किसी पर जोर जबरदस्ती नहीं की जा रही है। अभी तक करीब 10 शिविर लग चुके है और उसमें 5 लाख रुपए के लगभग का राजस्व प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि जो मकान गृहकर के दायरे में नहीं आते है, उनकी स्थिति जीआईएस सर्वे से साफ हो जाएगी।

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