धूप के रूप में बरस रहे अंगारे

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ललितपुर-  समूचा जिला भीषण गर्मी में उबल रहा है। तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के ऊपर पहुंच गया है तथा बुन्देलखण्ड में सर्वाधिक तापमान जिले का माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से तो अति ही हो गयी। स्थिति यह है कि लोगों का घरों से निकलना मुश्किल बना हुआ है। दिन रात गर्म हवा प्रवाहित होती रहती है। विद्युत आती भी है लेकिन वोल्टेज की कमी के कारण आना व न आना एक समान बना हुआ है।

भीषण गर्मी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा रहा है कि पशु पक्षी व्याकुल बने हुए है। दोपहर के समय आसमान एकदम साफ बना रहता। आसमान पर परिन्दे भी उड़ते दिखायी नहीं देते। वह घने पेड़ों की छाव में ही दिन गुजारते है। भीषण गर्मी के कारण जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त बना हुआ है। प्रात: व सायं काल में भी लोगों को सुख नहीं मिलता। ठण्डी हवा के लिए नागरिक पूरी तरह से इलैक्ट्रोनिक साधनों पर आश्रित बने हुए है, लेकिन वोल्टेज की कमी के कारण ठण्डी हवा ले पाना मुश्किल नहीं होता। इसके अलावा उनके जरूरी कामकाज भी प्रभावित बने रहते है। ज्यों-ज्यों गर्मी बढ़ रही है त्यों-त्यों विद्युत की समस्या विषम परिस्थिति में पहुचती चली जा रही है। बिजली आती भी है तो वोल्टेज इतना कम रहता कि बिजली आधारित यंत्र चल नहीं पाते। रोशनी भी कम होती है। भीषण गर्मी के पश्चात भी मच्छरों का उत्पात अभी भी बना हुआ है। चिकित्सालयों में भर्ती मरीजों में मलेरिया से ग्रसित लोगों की अभी भी बड़ी तादाद बनी हुई है। इस दफा कीटनाशक दवाओं का भी छिड़काव नहीं हुआ है। यही वजह है कि गर्मियों में भी मच्छर से निजात नहीं मिल पा रही है।

बुन्देलखण्ड के इस जिले में सर्वाधिक तापमान बना हुआ है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घरों के भीतर रखा हुआ पानी इतना गर्म हो जाता कि जैसे उबाल कर रख दिया हो। इससे जाहिर हो रहा है कि तापमान 48 डिग्री सेंटीग्रेट के आस-पास बना हुआ है। लोगों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़े हुए तापमान का प्रभाव जनजीवन पर सीधे तौर पर परिलक्षित हो रहा है। बारिश शुरू होने के पूर्व नागरिक छान छौनर को दुरुस्त बनाने में व्यस्त हो जाते है लेकिन गर्मी है कि मजदूर भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहे है। बुन्देलखण्ड में बिजली की आपूर्ति सही वोल्टेज के साथ होना चाहिए। खासतौर से इस जिले में वोल्टेज कम बना हुआ है। विभिन्न फीडरों से आपूर्तित हो रही बिजली का भी वोल्टेज कम रहता है। दूरस्थ क्षेत्रों में मौजूद बस्तियों में तो बल्ब जुगनू की माफिक टिमटिमाते है। पंखा अ‌र्द्धरात्रि के दौरान ही गति पकड़ता है।