दो अरब रुपए छह माह में खर्च करने की चुनौती

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सागर- डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय को प्रस्तुत बजट पूर्व में स्वीकृत हो चुका था। दो अरब रुपए से अधिक बजट को विगत दिनों दिल्ली में आयोजित बैठक में चर्चा करने के बाद छह माह में खर्च करने की चुनौती विवि को दी गई है। बैठक में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं अधिकारी शामिल हुए।
डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विवि से वित्त अधिकारी पीएन सिंह, वित्त कमेटी के प्रो. केसी जैन व अन्य अधिकारी शामिल हुए। श्री सिंह ने के अनुसार विवि की ओर से प्रस्तुत बजट को ज्यों का त्यों पूर्व में ही स्वीकृत किया जा चुका था, लेकिन इस बैठक में बजट में दर्शाए आय-व्यय, निर्माण कार्य आदि पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके बाद मंत्रालय की ओर से लगभग 218 करोड़ रुपए की बजट राशि स्वीकृत करते हुए जारी करने की बात कही।

यह राशि आगामी वित्त वर्ष शुरू होने से पहले 31 मार्च 2010 तक खर्च करना होगा। अथवा इतनी राशि के वर्क आर्डर जारी कराना होंगे। श्री सिंह ने बताया कि बजट की राशि किश्तों के रूप में अक्टूबर-नवंबर में आना शुरू हो जाएगी। विवि में यह पहला मौका है जब कि इतनी अधिक राशि बजट के रूप में मिलने जा रही है, लेकिन पूर्व के अनुभवों को देखते हुए यह राशि तय समय में खर्च किए जाने को लेकर संदेह है।

तत्कालीन कुलपति प्रो. डीपी सिंह के कार्यकाल में भवनों, हॉस्टल आदि की मरम्मत के लिए दस करोड़ रुपए यूजीसी द्वारा दिए गए थे, लेकिन तय समय में विवि प्रशासन इसकी आधी राशि भी खर्च नहीं कर पाया था। जिससे राशि लैप्स न होने की अवधि बढ़ाने के लिए यूजीसी से गुहार लगाना पड़ी थी।

इंजीनियरिंग विभाग में लंबे समय से चल रहे एक अधिकारी के वर्चस्व को कम करने के लिए कुलपति प्रो. एनएस गजभिए ने कम्प्यूटर साइंस विभाग के अध्यक्ष प्रो. आरएस कसाना को विभाग का प्रभारी बनाया है। अब देखना होगा कि इंजीनियरिंग विभाग किस तरह से कार्य करता है।

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