दीपदान मेले के लिए श्रद्धालुओं का आना जारी

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चित्रकूट- भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट में दीपदान के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। आस्था के आगे यात्रियों ने जान की परवाह तनिक भी नहीं की। उन्होंने ट्रेन की बोगियों और बसों में जगह न मिलने से छत पर सवार होकर कामदगिरि पहुंचे।

दीपावली की अंधेरी रात में कामदगिरि के साथ मां मंदाकिनी में दीपदान करने को लेकर श्रद्धालुओं का भारी संख्या में जमावड़ा यह बता रहा है कि आज भी धर्म की इस नगरी में सदियों से चली आ रही परंपरा पूरी तरह प्रासंगिक है। ‘कामदगिरि भे राम प्रसादा अवलोकत अपहरद विषादा’। प्रभु श्री राम की कथा के अमर गायक गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा श्री राम चरित मानस में लिखी इसी उक्ति की विलक्षण धर्मनगरी पर साफ दिखाई दे रही है।

दीपावली पर्व भगवान राम से जुड़ा होने के कारण इस अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन श्रद्धालु हर हालत में शाम तक चित्रकूट पहुंचकर वहां गंगा किनारे और कामदगिरि पर दीपदान करता है। अमावस्या के एक दिन पूर्व जगह-जगह से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हालांकि रेलवे प्रशासन और परिवहन विभाग ने बसों और ट्रेनों के इंतजाम रूटीन के अलावा कराये हुये हैं। इसके बावजूद भी यात्रियों की संख्या इतनी ज्यादा रही कि बसों और ट्रेन की बोगियों में तिल रखने की जगह नहीं है। उन पर आस्था इस कदर हावी दिखी कि वह यह भूल गये कि छत पर बैठकर यात्रा करना जान जोखिम में डाल रहे हैं। छत पर सवार यात्री लगातार जयश्रीराम और कामतानाथ के जयकारे भी लगा रहे थे

दीपदान मेले के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के आने का क्रम रात दिन चल रहा है। मुख्यालय से लेकर सीतापुर, राम मोहल्ला, जानकी कुंड, शिवरामपुर, सिरसावन, अनुसुइया आश्रम व गुप्त गोदावरी पर श्रद्धालुओं के जत्थे ही दिखाई दे रहे है। पांच दिनों तक चलने वाले मेले के पहले ही दिन से लोग यहां आने के बाद मंदाकिनी में डुबकी लगाने के साथ ही कामदगिरि की परिक्रमा भी लगा रहे है। काफी संख्या में लोग दंडवती परिक्रमा भी लगा रहे है। यात्रियों की सुविधाओं को दृष्टिगत रख प्रशासन ने व्यवस्थाएं की हैं। खोया पाया केंद्रों से लोगों के खोने व मिलने की सूचनायें भी प्रसारित होने लगी है। दोपहर की तपती धूप में भी आस्थावान साढ़े पांच किलोमीटर की परिक्रमा लगाने को आतुर दिखाई दे रहे है।

मप्र व उप्र के साथ ही अन्य राज्यों से लाखों श्रद्धालु अब तक यहां पहुंच चुके हैं। यात्रियों के पहुंचने का सिलसिला रात दिन चल रहा है।वहीं मेले को देखते हुए ग्वालियर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, फतेहपुर, सतना, रींवा आदि के सैकड़ों व्यापारियों ने यहां फुटपाथ पर अपनी दुकानें सजा ली हैं। बचे फुटपाथ पर भिखारियों ने अपने चद्दर आदि डाल रखी है। हर साल दीपावली मेले पर भिखारी यहां पर तरह-तरह के आडंबरों को दिखाकर लोगों की दया का पात्र बनकर भीख मांगते है।