दिल्ली की सरकार तय करेंगे 50 लाख बुंदेलखंडवासी

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7 फरवरी को दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाओ में सरकार बनाने में निर्णायक वोट बुंदेलखंड वाशियो का ही होने वाला है जानिए कैसे ff

“बाबू जी पिछली फसल को अधिक पानी ने खराब कर दिया और इस बार भी ओला से फसल ख़राब हो गई और कई सालो से पानी ही नहीं बरस रहा था । अब क्या करें, पेट भरने के लिए तो मजदूरी करनी ही पड़ेगी। पूरी गृहस्थी को ढो कर दिल्ली जाने वाले झाँसी के राम किशोर की यह व्यथा है। ऐसे कई लाख किसानों की त्रासदी बुंदेलखंड अरसे से झेल रहा है। जो रोजी रोटी के लिए दिल्ली और आस पास के इलाको में मेहनत मजदूरी करने चले जाते है.दिल्ली जाने वाले झाँसी के राम किशोर का कहना है की साल में एक दो बार अपने घर मोहले पड़ोसियों से मिलने आजाते है दिल्ली में वोटरकार्ड और राशनकार्ड बन गया गया है और वही वोट भी डालते है। ये केवल राम किशोर की बात नही वल्कि बुंदेलखंड से दिल्ली गए लाखो किसानो और मजदूर अब वाही के हो गए सभी से पास वोटर कार्ड भी है और दिल्ली में ही वोट भी डालते है इसके आलावा एक बड़ा तपका माध्यम वर्गीय परिवार का भी है जो वर्षो से दिल्ली में नौकरी और व्यापार कर रहे है।
और इस बार 7 फरवरी को दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाओ में सरकार बनाने में निर्णायक वोट बुंदेलखंड वाशियो का ही होने वाला है।

बुंदेलखंड से किओ हुआ पलायन

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में विभाजित बुंदेलखंड इलाका पिछले कई वर्षों से प्राकृति आपदाओं का दंश झेल रहा है। भुखमरी और सूखे की त्रासदी से अब तक 61 लाख से अधिक किसान `वीरों की धरती` से पलायन कर चुके हैं। यहां के किसानों को उम्मीद थी कि अबकी बार के लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दल सूखा और पलायन को अपना मुद्दा बनाएंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं और एक बार फिर यह मुद्दा जातीय बयार में दब सा गया है। `वीरों की धरती` कहा जाने वाला बुंदेलखंड देश में महाराष्ट्र के विदर्भ जैसी पहचान बना चुका है। बुंदेलखंड का भूभाग उत्तर प्रदेश के बांदा, चित्रकूट, महोबा, उरई-जालौन, झांसी व ललितपुर और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दतिया, पन्ना व दमोह जिलों में विभाजित है।
एक रिपोर्ट के मुताविक उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के जिलों में बांदा से सात लाख 37 हजार 920, चित्रकूट से तीन लाख 44 हजार 801, महोबा से दो लाख 97 हजार 547, हमीरपुर से चार लाख 17 हजार 489, उरई (जालौन) से पांच लाख 38 हजार 147, झांसी से पांच लाख 58 हजार 377 व ललितपुर से तीन लाख 81 हजार 316 और मध्य प्रदेश के हिस्से वाले जनपदों में टीकमगढ़ से पांच लाख 89 हजार 371, छतरपुर से सात लाख 66 हजार 809, सागर से आठ लाख 49 हजार 148, दतिया से दो लाख 901, पन्ना से दो लाख 56 हजार 270 और दतिया से दो लाख 70 हजार 477 किसान व कामगार आर्थिक तंगी की वजह से महानगरों की ओर पलायन कर चुके हैं।

विकास कुमार शर्मा
९४१५०६०११९

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