दबंगई : शिकायत करने पर मिलती है ग्रामीणों को जानमाल की धमकी दबंग के्रेशर उद्योग संचालकों की मनमानी से बीमार हो रहे हैं ग्रामीण

0
201

बंजर हो चले है सोना उगलने वाले खेत , ग्रामीणों का कहना जाएं तो जाएं कहां

कमाई तो कोई और कर रहा है लेकिन इसका खामियाजा किसी और को भुगतना पड़ रहा है।  कमोवेश यही हाल है आपरेशन पोस्ट भरतकूप व आसपास के ग्रामीण इलाकों में रहने वालों का। जिन्हें यहां संचालित क्रेशर उद्योग बीमार बना रहे हैं। लेकिन इनकी सुनने वाला कोई नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वे लोग प्रशासन से इनकी करतूतों की शिकायत करते हैंं क्रेशर उद्योग चलाने वाले दबंग लोग उन्हें तमाम तरह की धमकी देते हुए नाहक ही परेशान करते हैं। उनका कहना है कि बस्तियों के बीचों-बीच चल रहे क्रेशर उद्योगों से अब उनका जीना दुश्वार हो गया है।

गौरतलब है कि ऐसे उद्योग धंधे जिनके द्वारा आस-पास का वातावरण प्रदूषित हो और लोगों के  रोगग्रसित होने का भय हो बस्तियों से दूर चलाने व स्थापित करने के निर्देश शासन द्वारा दिए गए हैं। लेकिन झांसी-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग में बान्दा-चित्राकूट मार्ग पर स्थित आपरेशन पोस्ट भरतकूप में अंधाधुंध के्रशर उद्योग चल रहे हैं। जो ज्यादातर बस्तियों के बीच मे हैं। मानकों के विपरीत चलने वाले इन क्रेशर मशीनों के कारण आस-पास का वातावरण तो प्रदूषित हो ही गया है साथ ही यहां रहने वालों पर भी इसका दुष्प्रभाव होने लगा है। सूत्राों की भरतकूप के अलावा आस-पास की बस्तियों में रहने वाले ज्यादातर ग्रामीण श्वांस आदि विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो गए हैं। बीडर पुरवा गांव के मजरा गोड़ा की अनुसूचित बस्ती में रहने वाले विजयपाल, बाबू, रानी, प्रेमा, दुगाZ, कुवरियां, किंटर आदि ने बताया कि उनकी बस्ती में लगभग 500 की आबादी है जिनके पास कृषि योग्य भूमि है। बस्ती के लगभग 20 मीटर की दूरी में ही दो दबंगों की के्रशर मशीनें लगी हैं। जिनके कारण यहां का वातावरण पूरी तरह प्रदूषित हो गया है। इतना ही नहीं क्रेशर से रात-दिन उड़ने वाली धूल से बड़े-बुजुर्गों के अलावा बच्चे भी तमाम तरह की बीमारियों से ग्रसित हो गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि क्रेशर मशीनों से उठने वाली धूल उन्हें तो बीमार बना ही रही है साथ ही उनकी उपजाऊ जमीन भी बंजर होने लगी है। जिसके चलते खेती की लागत भी नहीं मिल पाती और उनके भूखों मरने तक की नौबत आ जाती है। जिसका फायदा भी क्रेशर उद्योग संचालक उठाते हैं और उन्हें अपनी मशीनों में काम करने को मजबूर कर देते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि जब इन क्रेशर मालिकों से मशीन चलाते समय मानको का ध्यान रखने की गुहार लगाई जाती है तो वे लोग अपनी दबंगई के बल पर उन्हें डराते धमकाते हैं। इसके अलावा शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी जाती है। उनका कहना है कि उन लोगों ने कई बार सम्बंधित अधिकारियों के अलावा शासन के उच्चाधिकारियों को पत्रा लिख मशीनें बस्ती से बाहर लगवाए जाने, अवैध व मानक के विपरीत चल रही मशीनों को बन्द कराए जाने, इनके कारण रोग ग्रसित हो गए लोगों की दवा और इलाज आदि का मुआवजा दिलाए जाने तथा दिन-रात चलने वाली मशीनों का समय निर्धारित कराए जाने की मांग की लेकिन उनकी इस गुहार पर आज तक किसी भी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया और दबंग के्रशर उद्योग संचालक अपनी मनमानी करने में जुटे हुए हैं।