तेज् धूप भी नहीं डिगा सकी आस्था

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चित्रकूट। वैशाख माह की शनीचरी अमावस्या पर तपती धूप व गर्मी भी श्रद्धालुओं का विश्वास डिगा नहीं पायी। ट्रेन की छत व बसों में भरकर आये लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में डुबकी लगायी। आस्थावानों ने तपती दुपहरी में भगवान कामतानाथ के दर्शन कर कामदगिरि की परिक्रमा लगायी।

शनीचरी अमावस्या का पुण्य पाने को श्रद्धालुओं ने शुक्रवार को ही मठ-मंदिरों व धर्मशालाओं में डेरा जमा लिया था। बढ़ते तापमान को देख इस बार लोगों को आशंका थी कि भीड़ कम होगी पर लाखों की संख्या में जुटे आस्थावानों ने सारे कयासों पर विराम लगा दिया। शुक्रवार को रात बारह बजे के बाद ही लोग स्नान के लिए रामघाट में जुट गए थे, सुबह होते-होते लाखों भक्तों ने मंदाकिनी में डुबकी लगाकर भगवान मत्स्यगयेंद्र नाथ का जलाभिषेक किया। इसके बाद कामदगिरि की परिक्रमा भी लगायी। भीड़ का सर्वाधिक दबाव भगवान कामतानाथ प्रमुख द्वार व रामघाट पर था। दोपहर को धूप होने पर भीड़ का दबाव कुछ कम हुआ तो सायंकाल फिर भीड़ बढ़ गयी। हनुमान धारा, जानकीकुंड, स्फटिक शिला, सती अनुसुइया व गुप्त गोदावरी में भी भारी भीड़भाड़ रही।

प्रशासन ने तीर्थ यात्रियों के आवागमन के लिए पर्याप्त बसों का इंतजाम किया था, परंतु सारे इंतजाम कम पड़ गये। तीर्थ यात्रियों ने चिलचिलाती धूप व गर्मी की चिंता किये बगैर ट्रेन की छत व रेल इंजन पर बैठकर यात्रा की।

अमावस्या मेले में प्रशासन ने सुरक्षा के साथ ही पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था ठीक ठाक की थी। गर्मी व उमस का हाल यह था कि तीर्थ यात्री हर पचास मीटर में पानी ढूंढ़ते दिखे। दिन में विद्युत कटौती से पेयजल आपूर्ति भी बाधित रही। टैकरों से सप्लाई किया गया पानी कम पड़ गया।

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