तीन चरणों में होगा सूखे से तड़पते बुंदेलखंड का उद्धार

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उरई- बुंदेलखंड के किसानों की मदद के लिए पहुंचे केंद्रीय अध्ययन दल ने यहां पर सूखे की स्थितियों का जायजा लिया। टीम ने बताया कि सूखे के कारण खरीफ की फसल में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई रबी की फसल का लक्ष्य बढ़ाकर करेंगे। इस बावत राज्य सरकारों को निर्देश भी दिये गये हैं। इसके अलावा बारिश के आंकड़े औसत के बजाय दिनवार मंगाये जायेंगे।

बुधवार को केंद्रीय दल ने सैदनगर व नुनसाई के बीच बना चेकडैम भी देखा। दल का नेतृत्व कर रहे केंद्रीय कृषि मंत्रालय के उपायुक्त राजेश कुमार तिवारी ने बताया कि जिलाधिकारी के मुताबिक जालौन मेंरबी बोवाई के लिए खाद-बीज की अग्रिम व्यवस्था है। केंद्र सरकार ने खरीफ में हुई क्षति की भरपाई के लिए राज्य सरकारों को रबी का लक्ष्य 15 प्रतिशत तक बढ़ाने को कहा है। श्री तिवारी ने कहा कि बारिश के बारे में अब दिनवार आंकड़े मंगाये जायेंगे। औसत बारिश के आंकड़े से पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं होती। सरकार का मुख्य जोर जल संरक्षण योजनाओं पर है। बार-बार सूखे का शिकार हो रहे बुंदेलखंड की स्थिति सुधारने को तीन बिंदुओं की रणनीति बनायी गयी है। इनमें तात्कालिक और दीर्घकालिक उपाय के साथ जो योजनाएं धनाभाव में अधूरी है, उनके लिए धन की व्यवस्था भी शामिल है। उप्र के बुंदेलखंड और विंध्याचल क्षेत्रों के लिए 5600 करोड़ रुपये का पैकेज केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया है। श्री तिवारी के साथ दो अन्य केंद्रीय अधिकारी डा. डी कुमार और वीरेद्र सिंह भी रहे। टीम बाद में बांदा चली गयी।