डीईओ के निलम्बन के बाद आबकारी निरीक्षक निशाने पर

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झांसी- देशी शराब की दुकानों के व्यवस्थापन नहीं हो पाने के मामले में जिला आबकारी अधिकारियों पर गाज गिरने के बाद अब कार्रवाई के डर से विभागीय निरीक्षकों की नींद उड़ी हुई है।
दरअसल, शासन ने लाटरी प्रक्रिया से 31 मार्च तक हर हाल में मदिरा की दुकानों के व्यवस्थापन कराने के आदेश दिए थे। स्थिति यह रही कि जिला आबकारी अधिकारियों द्वारा अनावश्यक रूप से कोट बढ़ा दिए जाने से दर्जनों दुकानों के लिए आवेदन ही नहीं आए। दुकानों के व्यवस्थापन में नाकाम रहने पर पिछले दिनों प्रमुख सचिव नेतराम ने झांसी, जालौन, आगरा के जिला आबकारी अधिकारियों को निलम्बित कर दिया था। इतना ही नहीं प्रमुख सचिव ने इस मामले में उप आबकारी आयुक्त व संयुक्त आबकारी आयुक्त की भी खबर ली।
प्रमुख सचिव के आदेश में उल्लेख किया गया था कि विभागीय अमले की निष्क्रियता और लापरवाही के चलते देशी शराब की दुकानों का व्यवस्थापन नहीं हो पाने से करोड़ों का राजस्व अधर में लटक गया। इसके लिए दोषी मानते हुए तीनों जिलों के आबकारी अधिकारियों के निलम्बन की कार्रवाई की जा चुकी है।
स्थिति यह है कि व्यवस्थापन से शेष रह गई देशी शराब की दुकानों में से कई दैनिक प्रणाली पर उठाए जाने के कारण राजस्व की मोटी चपत लगी है। लिहाजा अब उन आबकारी निरीक्षकों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जा सकती है जिनके सर्किल में व्यवस्थापन से अछूती रह गई दुकानों की संख्या अधिक है। इस स्थिति को देखते हुए सम्बन्धित निरीक्षक जोड़-तोड़ में जुट गए है।