झांसी में होगा एड्स का इलाज

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झांसी – अब वह दिन दूर नहीं जब एड्स जैसी जटिल बीमारी के रोगियों को इलाज कराने कहीं बाहर जाना पड़े, क्योंकि अगले माह से मेडिकल कालेज में इसके इलाज हेतु एण्टी रेट्रोवाइटल ट्रीटमेंट सेन्टर शुरू होने जा रहा है, जिसकी तैयारियां जोरों पर की जा रही है। सेंटर में अगले माह से सेवाएं शुरू करा दी जायेंगी।

बुन्देलखण्ड क्षेत्र में एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसियेंसी सिण्ड्रोम (एड्स) की बीमारी से ग्रसित रोगियों के लिये यहां कोई इलाज हेतु व्यवस्था नहीं है। उत्तर व मध्य प्रदेश से घिरे इस बुन्देलखण्ड क्षेत्र में इस समस्या को ध्यान में रखते हुये जनपद के पांच स्थानों पर वर्ष 2003 में स्वैच्छिक परामर्श एवं परीक्षण सेन्टर (वीसीटीसी) की स्थापना की गई थी। इन सेन्टरों पर एड्स रोगियों में ह्रामन इम्यूनोडेफिसियेंसी वायरस (एचआईवी) की जांच एवं परामर्श दिया जाता है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर अब तक रोगियों को लखनऊए दिल्ली सहित अन्य बड़े शहरों में इलाज हेतु भागदौड़ करनी पड़ती थी। इस गम्भीर मसले पर विचार करते हुये बुन्देलखण्ड क्षेत्र के एक मात्र महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एड्स का इलाज उपलब्ध कराने हेतु एआरटी सेंटर की स्थापना हेतु एक प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था।  राष्ट्रीय एड्स नियन्त्रण सोसाइटी (नाको) ने एआरटी सेंटर बनाने हेतु मेडिकल कालेज को  मंजूरी दे दी। इसके बाद मेडिकल कालेज प्रशासन द्वारा इसके प्रथम चरण में स्टाफ की नियुक्ति की गई। सेंटर की पूरी जिम्मेदारी माइक्रोबायॉलजी विभाग को सौंपी गई है। इस पर मेडिकल कालेज के प्रमुख अधीक्षक एवं माइक्रोबायॉलजी के विभागाध्यक्ष डॉ. आर.अग्रवाल ने बताया कि पुरानी इमरजेंसी में उपकरण को व्यवस्थित किये जाने पर तैयारी चल रही है। जिसके चलते अप्रैल के प्रथम सप्ताह से सेन्टर की सेवाएं शुरू करा दी जायेंगी।


Vikas Sharma
bundelkhandlive.com
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