झाँसी में सात फेरे तो पूरे, अनुदान का फेरा एक माह बाद भी अधूरा

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सीएम सामूहिक विवाह योजना के तहत विवाह करने वाले दूल्हा.दुल्हन के खाते में नहीं पहुंची सहायता राशि। चेक के लिए लगाना पड़ रहा चक्‍कर।

झाँसी। शहनाई बजी, दूल्हा- दुल्हन घर पहुंच गए और मु यमंत्री की सामूहिक विवाह योजना सार्थक हो गई, लेकिन अफसर शहनाई की रकम पर कुंडली मारकर बैठ गए। विवाह के एक माह बाद भी योजना में शामिल वर- वधू को अनुदान की रकम नहीं मिल पाई है।मु यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बंगरा खंड विकास अधिकारी की तरफ  से 24 दिसंबर 2018 को दस जोड़ों का विवाह कराया गया था। विवाह बंधन में बंधने के बाद वर- वधू को सरकार की तरफ  से मिलने वाले बीस – बीस हजार रुपये के अनुदान के लिए दौडऩा पड़ रहा है। नगरीय क्षेत्र में मु यमंत्री सामूहिक विवाह का आयोजन नगर निगम की तरफ से देखा जा रहा था और अनुदान की राशि भी नगर निगम के खाते में आई थी। वर-वधू को दी गई चेक को बंगरा स्थित पंजाब नेशनल बैंक में जमा किया तो उस खाते में पैसा नहीं है। चेक वर-वधू को वापस आ गया। इसी तरह बर्तन, ज्वैलरी, कपड़े के दुकानदारों को दिए गए चेक भी वापस आ गए हैँ। जिस बैंक में चेक जमा कराए गए हैं, उस खाता में पैसा ही नहीं है। इसको लेकर दुकानदारों में काफी आक्रोश व्याप्त है।
सामुहिक विवाह योजना में खेलगरीब परिवार से ताल्लूक रखने वाली बेटियों के हाथ पीले करने के पवित्र उद्देश्य से शुरू की गई मु यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को झाँसी जनपद में प्रशासनिक अधिकारियों ने मजाक बना कर रख दिया है। दस जोड़ों की शादी करवाकर प्रशासनिक अधिकारियों ने सरकार की मंशा में पलीता लगाने के साथ ही लाखों रुपये का बंदर बांट कर डाला है । सामुहिक शादी के लिए दी गई चेक तक बाउंस हो गई है। इसी तरह दुकानदारों को भी पैसा नहीं दिया है। इसको लेकर दुकानदारों में काफी आक्रोश व्याप्त है। न छापने की शर्त पर दुकानदारों का कहना है कि जो चेक दी गई थी, उस चेक पर भी पैसा नहीं है।
ऐसे बजनी है शहनाईमु यमंत्री ने अनुसूचित जातिए जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग अल्पसं यक वर्ग एवं सामान्य वर्ग के गरीबों की पुत्रियों की शादी के लिए सामूहिक विवाह योजना चालू की थी। इसमें निराश्रित कन्या विधवा की पुत्री दिव्यांगजन अभिभावक की पुत्री और दिव्यांग कन्या को प्राथमिकता दी जानी है। एक जोड़े पर करीब 35 हजार का खर्च रखा गया है। इसके तहत कन्या के खाते में बीस हजार रुपये जमा होने हैं जबकि विधवा तलाकशुदा के मामले में सहायता राशि 25 हजार रुपये दी जाती है।
शादी अनुदान बनी सामूहिक विवाह योजना शादी अनुदान योजना अब योगी सरकार में सामूहिक विवाह योजना के रूप में परिवर्तित हो गई है। पिछले सपा सरकार में यह योजना शादी अनुदान योजना के नाम से चलाई जा रही है। इसके तहत प्रत्येक गरीब जरूरतमंद कन्या के विवाह में सरकार की ओर से आर्थिक मदद की जाएगी। योजना के तहत जिला प्रशासन के द्वारा सामूहिक रूप से विवाह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही शासन द्वारा बतौर कन्या को 30 हजार रुपये का अनुदान भी दिया जाएगा। शादी अनुदान योजना को सरकार ने बदलकर मु यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का नाम दिया है। समाज कल्याण निदेशालय ने नई योजना का आदेश जारी कर दिया है। योजना के तहत जिले में निकाय स्तर पर सामूहिक विवाह कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित विवाह समिति की ओर से क्रियान्वित किया जाएगा। सामूहिक विवाह कार्यक्रम के लिए निकाय स्तर, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत, शासकीय संस्थाएं और एनजीओ को डीएम अनुमति प्रदान करेंगे। समारोह में सभी प्रकार की व्यवस्थाएं आयोजक समिति द्वारा की जाएगी। योजना के तहत 20 हजार रुपये कन्या के बैंक खाते में भेजे जाएंगे। साथ ही विधवा और परित्यक्ता को 25 हजार रुपये मिलेंगे। कन्या को पायल, बिछिया, कपड़े और बर्तन के लिए दस हजार और विधवा और अन्य को पांच हजार रुपये मिलेंगे। इसके साथ ही आयोजक विवाह सीमित को प्रति जोड़े के हिसाब से सरकार की ओर से पांच हजार रुपये का भुगतान किया जाएगा। एक सामूहिक विवाह समारोह में कम से कम दस जोड़े भाग लेंगे।
ये होगें पात्र- – कन्या के अभिभावक प्रदेश के मूल निवासी हों। – कन्या के अभिभावक निराश्रित, जरूरतमंद और गरीब हों। – वार्षिक आय सीमा शहरी क्षेत्र में 56460 रुपये और ग्रामीण क्षेत्र में 46080 रुपये हो। – कन्या की उम्र 18 और वर की उम्र 21 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।