झाँसी जिले में चुनावी घमाशान जोरो पर है

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बुंदेलखंड की राजनीती का गड कहलाने बाली झाँसी और  रानी लक्ष्मी बाई,झलकारी बाई की  वीरता की नगरी कहलाने बाली झाँसी जिले में चुनावी घमाशान जोरो पर है झाँसी की चारो विधानसभा सीटो पर प्रमुख पार्टी के अलाबा  कुल ५८ प्रत्यासी मेदान में है झाँसी जिले की चारो किसी न किसी सीट पर जाने माने चहरे मेदान में अपना भाग्य अजमा रहे है झांसी जिले में विधानसभा की चार सीटें हैं, ये बबीना, झांसी, मऊ रानीपुर और गरोठा हैं.
2007 के विधानसभा चुनाव में चार में बीएसपी को 2 सीटें मिली थीं. जबकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को एक-एक सीट मिली थी.
झांसी विधानसभा सीट पर 2007 में कांग्रेस के प्रदीप जैन ने बीएसपी के रमेश कुमार शर्मा को करीब 34 हजार वोटों से हराया था. बाद में प्रदीप जैन 2009 का लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बन गए थे. लिहाजा इस सीट के लिए हुए उपचुनाव में बीएसपी ने जीत दर्ज की. इस बार झांसी सीट से समाजवादी पार्टी के असफान सिद्दीकी,  बीजेपी के रवि शर्मा,बुंदेलखंड कांग्रेस के  फिल्म अभिनेता रजा बुंदेला, और बीएसपी के सीताराम कुशवाहा चुनाव लड़ रहे हैं.

2007 के चुनाव में बबीना विधानसभा सीट पर बीएसपी ने कब्जा जमाया था. इस बार यहां से बीएसपी से कृष्णपाल सिंह राजपूत, एसपी से  पूर्व सांसद चंद्रपाल सिंह यादव, कांग्रेस से राजेंद्र सिंह यादव और बीजेपी से पूर्व एम्.एल.सी श्याम सुंदर सिंह किस्मत आजमा रहे हैं.

2007 के चुनाव में मऊ रानीपुर सीट पर भी बीएसपी ने जीत दर्ज की थी. इस बार यहां से बीएसपी से राजेंद्र राहुल अहिरवार, एसपी से डॉक्टर रश्मि आर्य, कांग्रेस से पूर्व मंत्री बिहारी लाल आर्य  और बीजेपी से प्रागीलाल अहिरवार मैदान में हैं.

गरहौटा विधानसभा सीट पर 2007 के चुनाव में एसपी को जीत मिली थी. इस बार एसपी से दीप नारायण सिंह, बीएसपी से देवेश कुमार पालीवाल, बीजेपी से टिकाराम पटेल और कांग्रेस से पूर्व मंत्री रंजीत सिंह जूदेव चुनाव लड़ रहे हैं.

झांसी में विकास, बिजली, पानी और बेरोजगारी अहम चुनावी मुद्दे हैं. सूखे की वजह से खेती का भी यहां बुरा हाल है जिससे कर्ज के बोझ तले दबे किसान यहां खुदकुशी तक कर रहे हैं.

Vikas Sharma
Editor
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