जाली मार्कशीट तीन हजार में

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ग्वालियर- गोला का मंदिर पुलिस थाना की गिरफ्त में आया जाली मार्कशीट बनाने वाला गिरोह फेल छात्रों को पांच सौ से तीन हजार रुपए में मार्कशीट बेचता था। गिरोह के सदस्यों के पास से दो सैकड़ा से अधिक तैयार व खाली मार्कशीट व शिक्षा विभाग की सीलें बरामद हुईं हैं। गिरोह का सरगना दो साल पहले भी यही काम करते पकड़ा जा चुका है।

एएसपी शहर मनोहर वर्मा ने बताया कि दो दिन पूर्व गोला का मंदिर थाना पुलिस ने सात छात्रों के खिलाफ जाली मार्कशीटों का उपयोग करने पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। इन्होंने आईटीआई बिरलानगर में जाली मार्कशीट की मदद से जून में प्रवेश लिया था। मार्कशीटों की बनावट व कलर पर प्राचार्य को संदेह हुआ और उन्होंने सातों छात्रों की मार्कशीट वेरीफिकेशन के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल कार्यालय भोपाल भेज दी। जांच में सभी मार्कशीटें जाली पाई गईं।

जांच रिपोर्ट आने के बाद प्राचार्य ने देवेन्द्र सिंह, दीपक कुमार, राकेश, धर्मेन्द, वीरेन्द्र माथुर, नितिन राठौर व धर्मेन्द सोनी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला गोला का मंदिर थाने में दर्ज करवा दिया। पुलिस ने इनमें वीरेन्द्र माथुर व नितिन राठौर को पकड़कर पूछताछ की तो इन्होंने बताया कि वीरेन्द्र धाकड़ निवासी गोसपुरा व ओमभान सिंह, आनंद सिसौदिया निवासी बिरला नगर ने इन्हें मार्कशीट बनाकर दी थी। पुलिस ने वीरेन्द्र व ओमभान को पकड़ लिया। दोनों ने बताया कि इस रैकेट का सरगना आनंद सिसौदिया है, इसके घर से ही ये लोग रैकेट चलाते थे।

पकड़े गए रैकेट के सदस्यों ने पुलिस को बताया कि एक मार्कशीट के एवज में पांच सौ से तीन हजार रुपए तक में सौदा तय होता था। आधे पैसे एडवांस में तथा शेष मार्कशीट बन जाने के बाद देने होते थे। पुलिस ने रैकेट के पकड़े गए सदस्यों से एक दर्जन सील बरामद की हैं जिनमें जिला शिक्षा अधिकारी,माध्यमिक शिक्षा मंडल व अनेक स्कूलों की सीलें शामिल हैं।

दो साथियों के पकड़े जाने की भनक लगते ही रैकेट का सरगना आनंद घर पर ताला लगाकर फरार हो गया। पुलिस इसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर छापे मार रही है। आनंद सिसौदिया दो वर्ष पूर्व इंदरगंज थाना क्षेत्र में भी यही धंधा करते पकड़ा जा चुका है।