जापानी दल ने देखी बुंदेलखंड की विभीषिका

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बुंदेलखंड के लोगों और प्रदेश सरकार ने सूखे की विभीषिका से कोई सबक नहीं लिया। वर्षा होते ही सभी अकाल के दिनों को भूल गये। इससे बेफिक्र विदेशी अध्ययन दल लगातार यहां आ इसके कारण और निवारण की पड़ताल कर रहे हैं।

जापान से यहां आये दो वरिष्ठ पत्रकारों ने आधा दर्जन गांवों का भ्रमण कर हालात का जायजा लिया। उम्मीद है कि जापान सरकार सूखे बुंदेलखंड को इस संकट से उबारने को कोई वृहद योजना बनायेगी। वह इससे निपटने के उपाय तलाशने की योजना के तहत अध्ययन करने आये थे। जापान ब्राडकास्टिंग कार्पोरेशन के चीफ शागो ताकाहाशी व एनएचकेके टोक्यो निवासी वरिष्ठ पत्रकार हिपिकी कुकुई अपने सहयोगी कैमरामैन राकेश नागर के साथ शनिवार को यहां आये। उन्होंने आधा दर्जन गांवों में जाकर किसानों के हालात व उनकी जीवन शैली को देखा। पठारी क्षेत्र में घटते भूगर्भीय जलस्तर के बारे में लोगों से जानकारी ली। सूखे की विभीषिका के दौरान आत्महत्या करने वालों की सूची लेने वह कृति शोध संस्थान कार्यालय पहुंचे। अध्ययनदल ने मुहारी गांव के मृतक पूरनलाल राजपूत के घर जा परिजनों से उस समय के हालात जाने। पूरनलाल के पहले तंगहाली से जूझते उसके पुत्र विपिन ने आत्महत्या कर ली थी। दुभाषिये के जरिये उन्होंने विपिन के भाई भइयालाल से परिवार की दर्द भरी कहानी जानी। पचपहरा गांव पहुंच इस दल ने किसानों से सूखे से निपटने के उपायों पर चर्चा की। मुख्यालय आ दल ने जलापूर्ति के प्रमुख श्रोत मदनसागर व कीरतसागर का निरीक्षण किया। दिनभर विभिन्न गांवों की खाक छानने के बाद यह दल बांदा रवाना हो गया। जागरण से हुई भेंटवार्ता में शागो ताकाहाशी ने बताया कि अध्ययन कार्य 30 अप्रैल तक जारी रहेगा। वह बुंदेलखंड के सातों जिलों की तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार कर भारत व जापान सरकार को सौंपेंगे। संभव है इसके कुछ सकारात्मक व उत्साहजनक परिणाम सामने आयें।