जागरूकता न होने के कारण सूचना के अधिकार का लाभ नहीं ले पाते

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हमीरपुर- केंद्र सरकार द्वारा आम लोगों को सूचना का अधिकार अधिनियम एक ऐसा हथियार दिया है, जो किसी भी विभाग से कोई भी सूचना इस अधिनियम के तहत मांग सकता है। मगर लोगों को जानकारी न होने के कारण लोग इस सुविधा का लाभ नहीं ले पाते। इतना ही नहीं कई लोगों द्वारा कई विभागों से इस अधिकार का प्रयोग कर सूचनाएं मांगी, मगर विभाग द्वारा सूचना न मिलने के कारण शांत होकर बैठ गये।

विभागों द्वारा विकास कार्य में घटिया सामग्री लगाने और विकास के लिए ग्राम पंचायतों में आयी धनराशि की जानकारी लोगों को नहीं मिल पाती थी, कि कितनी धनराशि किस मद में आयी और कब खर्च कहां, कैसे कर दी गयी। जिस पर अधिकारी और कर्मचारी मनमानी तरीके से खर्च कर लेते थे और लोगों को भनक नहीं लग पाती थी। इन सब को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 05 में आम लोगों को एक ऐसा हथियार दिया, जो इस हथियार का प्रयोग कर किसी भी विभाग से कोई भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम लागू हुए 4 साल बीत जाने के बाद भी आज तक लोगों को इसकी जानकारी नहीं हो पायी है कि विभागों द्वारा सूचना कैसे प्राप्त करें। यदि सूचना विभाग द्वारा नहीं दी जाती, तो लोगों कहां जायें। कई लोगों ने सूचना लेनी भी चाही, तो विभाग द्वारा सूचना न देने पर वह शांत होकर घर में बैठ गये। जलालपुर ग्राम के पूर्व प्रधान अरुण द्विवेदी का कहना है कि शासन प्रशासन के लोग नहीं चाहते कि इसकी जानकारी लोगों को हो। यही कारण है कि इसके बारे में गहरायी से लोगों को जानकारी नहीं दी जाती है। इसके तहत मांगी गयी सूचना के लिए भी लोगों को महीनों मशक्कत करनी पड़ती है, फिर भी लोगों को सूचना नहीं मिल पाती है। जागरूकता न होने के कारण इसका लाभ नहीं ले पाते। सूचना के अधिकार के बारे में अभियान चलाकर लोगों को जानकारी देना चाहिए। तभी इसका लाभ लोगों को मिल सकता है।

सूचना के अधिकार में 30 दिन में रिपोर्ट मिल जानी चाहिए। अगर नहीं मिलती है, तो इसके लिए अपील एडीएम से की जा सकती है। इसके लिए 45 दिन का समय मुकर्रर है। अगर फिर भी रिपोर्ट न मिले तो राज्य सूचना आयोग में इसकी अपील की जा सकती है।

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