जय हिन्द के साथ ओबामा विदा…..

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नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का तीन दिवसीय भारत दौरा मंगलवार को खत्म हो गया। दिल्ली के पालम हवाई अड्डे से उनके एयरफोर्स वन विमान ने सऊदी अरब के लिए उड़ान भरी। व्हाइट हाउस ने इस सफल दौरे के लिए पीएम मोदी और भारतीय जनता को धन्यवाद दिया। वहीं, मोदी ने भी ट्वीट करके उनके सफल यात्रा की कामना की। ऐसे में जब अमेरिकी राष्ट्रपति का दौरा खत्म हो चुका है, ये सवाल उठने लाजिमी हैं कि भारत को क्या हासिल हुआ। जानकार मानते हैं कि इस दौरे से जितना कुछ भारत को मिला, उतना ही यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी फायदेमंद रहा। बराक ओबामा से निकटता ने उनकी ग्लोबल इमेज को एक नया मुकाम दिया है। इसके अलावा, कामयाब न्यूक्लियर डील, अमेरिका से भारी भरकम निवेश के भरोसे और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाकर पीएम मोदी ने अपने नेतृत्व का लोहा मनवाया है। एक्सपर्ट मानते हैं कि भारत के प्रति अमेरिका का नजरिया अब काफी बदल चुका है।
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ओबामा के तीन दिन के दौरे की सफलता का श्रेय लेखक और विश्लेषक शंकर अय्यर पीएम मोदी और उनकी सरकार को देते हैं। पिछली साल सितंबर महीने में अमेरिकी दौरे के दौरान ही मोदी ने ओबामा के इस दौरे का खांका तैयार कर दिया था। न्यूक्लियर डील पर सहमति की शुरुआत हो या फिर निवेश लाने की कोशिश, पीएम मोदी ने आगे बढ़ कर सभी मुद्दों का नेतृत्व किया। अय्यर कहा कि पिछली सरकार की निष्क्रियता के कारण 2010 में जब ओबामा भारत आए थे तो भारत को बहुत ज्यादा कुछ हासिल नहीं हो सका था। हालांकि, अटल बिहारी वाजपेयी ने क्लिंटन के साथ ठीक उसी तरह का संबंध की शुरूआत की, जैसा कि आज पीएम मोदी और ओबामा के बीच है। अपना अंतिम कार्यकाल पूरा कर रहे ओबामा अपनी लेगसी छोड़ कर जाना चाहते हैं इसलिए वह पिछली बातों को नहीं दोहरा रहे हैं जो वह अपने पहले कार्यकाल में कहा करते थे। इसका असर अमेरिकी निवेशकों पर भी पड़ा है। अय्यर के मुताबिक, इससे पहले यहां के वित्त मंत्री अमेरिका जाते थे तो वहां की कंपनियों के सीईओ मुलाकात को तैयार नहीं होते, अगर मुलाकात करते भी तो केवल निवेश को लेकर होने वाली अड़चनों की शिकायत करते थे। लेकिन मोदी ने देश की छवि बदलने की कोशिश की और अमेरिकी कंपनियों को विश्वास दिलाया कि देश में चीजें बदल रहीं हैं और निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं।

अमेरिका भारत को आज नई नजर से देख रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण देश में स्थायी सरकार बनना जो अपने हिसाब से फैसले लेने में सक्षम है। राजनीतिक विश्लेषक कंचन गुप्ता का कहना है कि पिछली सरकार में अंदरुनी स्थिरता नहीं थी, जोकि बदले हालात में आज मोदी सरकार की सबसे बड़ी ताकत बन रही है। पिछली सरकार में खींचतान और गठबंधन की सरकार होने के कारण नीतिगत फैसले लेने में मुश्किलें होती थीं, जो कि मोदी सरकार के साथ नहीं है।

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