जन सूचना अधिकार नियम का अध्ययन करें-रणजीत सिंह

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चित्रकूट-राज्य मुख्य सूचना आयुक्त रणजीत सिंह ने सोमवार को कलेक्ट्रट सभागार में जिले के सभी आला अधिकारियों की बैठक ली। जिसमे उन्होंने जन सूचना अधिकार के तहत लंबित मामलो की समीक्षा करते हुए उनका निस्तारण न होने के बारे में जानकारी ली। बैठक के दौरान उन्होंने सभी अधिकारियों को लोगों द्वारा मांगी गई सूचनाएं समयावधि के अन्दर देने के भी निर्देश दिए।

बैठक को में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त श्री सिंह ने कहा कि सरकारी कामों में पारदर्शिता बरतने व धांधलेबाजी को नियन्त्रित करने के लिए सरकार द्वारा  वर्ष 05 में राज्य जन सूचना अधिनियम पूरे देश में लागू किया गया था। लेकिन लोगों द्वारा मांगी गई सूचनाएं सम्बंधित अधिकारियों द्वारा समय से नहीं उपलब्ध कराई गईं। जिसके चलते जिले के 91 लोगों द्वारा इस सम्बंध में आयोग को पत्रा लिखे गए हैं।

श्री सिंह ने कहा कि ऐसे अधिकारी जिन्हें इस कानून के बारे में किसी भी प्रकार का सन्देह हो तो वे इसका पूरा अध्ययन करें। ताकि लोगों को सूचनाएं देने में किसी भी प्रकार की शंका न रहे। बैठक के दौरान अधिकारियों को जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि विभागों के ऐसे निलंबित अधिकारी व कर्मचारी जिन्हें चार माह तक चार्जशीट नहीं दी गई वे भी इस कानून का प्रयोग करते हुए सूचनाएं मांग सकते हैं। उन्होंने कहा कि मांगी गई सूचना यदि उनसे सम्बंधित नहीं है तो इसे पांच दिन के अन्दर आवेदक को लौटा दें। तीस दिन का समय बहुत होता है इस दौरान किसी भी प्रकार की सूचना उपलब्ध कराना बहुत कठिन कार्य नहीं है।18ckt32

उन्होंने बताया कि सूचना आयोग की वेबसाइट- यूपीएसआईसी, यूपीएनआईसी डॉट इन में लंबित प्रकरण देखे जा सकते हैं। आयुक्त श्री सिंह ने जिलाधिकारी से कहा कि वे स्वयं भी प्रत्येक माह वेबसाईट देख कर उचित कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए आवेदक से 2 रुपये प्रति कापी लेने का नियम है। यदि आवेदक द्वारा यह शुल्क नहीं दिया जाता तो इसकी जानकारी आयोग को दें। बैठक में अधिकारियों से चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सूचना अधिकार से सम्बंधित सभी पत्रावलियों का रखरखाव ठीक तरह से करें। यदि मांगी गई सूचनाएं निर्धारित तिथि तक नहीं उपलब्ध कराई गई और मामला आयोग तक आया तो सम्बंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक में ही उन्होंने बीएसए, डीआईओएस, अधिशासी अधिकारी विद्युत, आदि से लंबित शिकायतों के बारे में जानकारी की। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग द्वारा विद्युत पोलों से सम्बंधित जानकारी नहीं उपलब्ध कराई जा सकती क्योंकि बिजली के खंभे स्थितियों के अनुसार ही लगाए जाते हैं। इसके अलावा उन्होंने सभी अधिकारियों को अपने-अपने कार्यालयों मे बोर्ड लगाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसे कई अधिकारी हैं जिन्हें मांगी गई सूचनाएं न उपलब्ध कराने पर 25 हजार रुपये का दण्ड दिया गया है। ऐसे लोगों की श्रेणी में आने से बचने के लिए समय से सूचनाएं उपलब्ध कराने के भी अधिकारियों को निर्देश दिए। इस अवसर पर प्रभारी जिलाधिकारी राजाराम ने बताया कि 91 लंबित मामलों में 17 निस्तारित कर दिए गए हैं। बाकी बचे मामलों का भी निस्तारण यथा शीघ्र कर दिया जाएगा। बैठक में सीडीओ भारत यादव सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।

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