जनता का अमन चैन रास ना आया नेताओ को, काले करोवरियो पर सफेद पोस का हाथ….

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झांसी। नेताओं की सिफारिश नहीं मानने का खामियाजा एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे को भुगतना पड़ा।
सोमवार की शाम शासन ने बड़े पैमाने पर तबादले की लिस्ट जारी कर दी उस लिस्ट में एस एस पी झाँसी सुभाष चंद्र दुबे का नाम शायद इसलिए सामिल था कि उन्होंने नेताओ की नाजायज सिफारिश नही मानी । उनका स्थानांतरण कर दिया। उन्होंने अपने 141 दिवसीय कार्यकाल में 87 खुलासे किए। झाँसी में उनके कार्य करने का अनुभव एक छात्र की तरह रहा नाकी IPS की तरह हर अपराध को वरिकी से जानना और अपराधी को सलाखों में भेजने तक का काम एक छात्र की तरह किया और इसमें पूरा साथ उनके सहयोगी टीम ने दिया, अल्प समय में खुलासो की वारिस करने बाले पुलिस अधिकारी कम ही मिले है। एस एस पी के ट्रांसफर की मुख्य वजह सट्टा माफियाओ और नकली शराब करोवरियो पर की गई सख्त कारवाही को माना जा रहा है , जिससे अवैध करोवरियो के काम बंद हो गये थे , और नो महीने बाद होने बाले विधान सभा चुनाव में होने बाले खर्च हो देखते हुए नेताओ के लिए एसएसपी का तबादला जरुरी हो गया था क्युकि नेताओ को फंडिंग भी तो यही काले कारोबारी ही करते है।

झांसी में सुभाष चंद्र दुबे ने 21 सितंबर 2015 को एसएसपी का पदभार ग्रहण किया था। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक खुलासे करना शुरू कर दिए। उनके कार्यकाल के दौरान नवाबाद थाना क्षेत्र से डॉ. अभय गुप्ता के पुत्र का अपहरण व सर्राफा व्यवसायी कमलेश के अपहरण का चौबीस घंटे में खुलासा, कंबल मिल के पास एक मकान में छापा मारकर दो करोड़ की नकली व जहरीली शराब बरामद करके वह लोगों में चर्चित हो गए।
मऊरानीपुर के शिवगंज मुहल्ले के बालक लोकेश की हत्या दुष्कर्म, मोगली चोर गिरोह, मऊरानीपुर में लुटेरों गैंग, टहरौली क्षेत्र में तमंचा फैक्ट्री, रक्सा के ग्राम डेली हाईवे पुल पर कारोबारी राजकुमार साहू के साथ लाखों की लूट, रिटायर्ड फौजी ओमप्रकाश की लूटी गई बंदूक बरामद समेत कई चर्चित घटनाओं का खुलासा करने पर दुबे ने आम जनता के बीच अच्छी पहचान बनाई।

खुलासा किए गए मामलों में एक दर्जन से अधिक ऐसे मामले थे, जो उनके कार्यकाल के पूर्व घटित हुए थे। आम धारणा है कि दुबे के कार्यकाल में जनपद में अपराधों पर काफी हद तक लगाम लगी। उन्होंने अपने कार्यालय में आने वाले पीड़ितों को भी कभी निराश नहीं किया। लेकिन इसके विपरीत उनसे जिले में नेता इस बात को लेकर काफी नाराज थे कि वह नेताओं की सिफारिश नहीं मानते थे। माना जा रहा है कि नेताओं की नाराजगी ही उनके तबादले का कारण बनी है।

उल्लेखनीय है कि अपनी बेलाग कार्यप्रणाली को लेकर सुभाष चंद्र दुबे पहले भी सफेदपोशों व राज नेताओं की आंख की किरकिरी बने रहे हैं। इसके खामियाजे के रूप में वह किसी भी जनपद में लंबे समय तक टिक नहीं पाए हैं। इस बार उन्हें लूप लाइन में भेज दिया गया।

स्थानांतरण के विरोध में धरना दिया

झांसी। एसएसपी के स्थानांतरण के विरोध में सोमवार की रात इलाइट चौराहे पर व्यापारियों व पत्रकारों ने धरना दिया। सोमवार की शाम एसएसपी के स्थानांतरण की खबर आते ही उनके शुभचिंतकों व उनकी कार्यप्रणाली से उत्साहित लोगों में निराशा छा गई। बड़ी संख्या में व्यापारी व पत्रकार उनके निवास पर पहुंच गए। तदुपरांत उनके स्थानांतरण को निरस्त करने की मांग को लेकर सभी धरने पर बैठ गए। बाद में यह लोग इलाइट चौराहा पर आकर पर बैठ गए। मध्य रात्रि बाद तक वयापारी नेता , सर्राफा कारोबारी , इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव अनु निगम, मीडिया आदि के साथ काफी संख्या में व्यापारी व पत्रकार धरने में बैठे हुए थे