चुनाव आयोग ने छीन ली रोजी

0
265

बांदा। कभी न फुरसत पाने वाले पेंटरों के हाथ इस समय खाली हैं। खासकर चुनावी सीजन में तो क्या दिन-क्या रात, चौबीसों घंटे काम में व्यस्त रहने वाले पेंटर चुनाव आयोग को कोस रहे हैं, क्योंकि वह आसरा लगाये थे कि प्रत्येक चुनावी वर्ष की तरह इस बार भी बीस से पचीस हजार तो कमा ही लेंगे, पर इस बार निराश मुद्रा में उनके मुंह से यही निकलता है कि चुनाव आयोग ने तो छीन ली रोजी।

शहर के बाकरगंज मुहल्ले में निजी दुकान खोले पेंटर बाबूलाल चक्रवर्ती बताते हैं कि पहले तो लगता था कि इस व्यवसाय में बहुत फायदा है, मगर अब इससे दाल-रोटी का जुगाड़ करना भी मुश्किल है। बताया कि लोकसभा चुनाव में काम मिलने की आसरा लेकर तीन लड़के भी रख लिये थे, जिन्हें दूसरे कामों की आमदनी से खर्चा देना पड़ता है। पेंटरी का काम सीख रहे वीरेंद्र का कहना है कि पहले चुनाव के दौरान बैनर, पोस्टर, झंडे आदि प्रचार सामग्री बनाने में अच्छा-खासा मुनाफा होता था। इस बार तो कोई पूछता तक नहीं है। आजाद आर्ट के धनीराम पेंटर काफी नाराज हैं। वह कहते हैं कि एक महीने में कम से कम पांच से दस हजार तक कमा लेते थे। इस बार तो चुनाव आयोग ने रोजी छीन ली। अब तो वाल पेंटिंग तक को मनाही है, नहीं तो बेरोजगारों को एक महीने तक तो काम मिल ही जाता था।

कल्लू और भूरा पेंटर का कहना है कि चुनाव आयोग ने तो पेट में लात मारने का काम किया है। चुनाव प्रचार सामग्री बनाने में अच्छा-खासा मुनाफा हो जाता था। बीस से पचीस हजार खर्चा निकालने के बाद बच जाता था, लेकिन इस बार खाली हाथ बैठकर ग्राहकों की बाट जोह रहे हैं। चुनाव प्रचार सामग्री से इतर इक्का-दुक्का काम आ पाता है, वही जीविका का सहारा है।