चढ़ावे के गबन का पर्दाफाश करने पर पुजारी की जीभ काटी

0
273

बांदा-शहर के सघन आबादी वाले बाबूलाल चौराहा स्थित काली मंदिर में चढ़ावे के 49 लाख रुपये का गबन सार्वजनिक करने पर कमेटी के लोगों ने आरती के दौरान पुजारी पर हमलाकर उसकी जीभ काट दी। घटना के बाद मंदिर में भगदड़ मच गयी। घायल पुजारी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

शनिवार रात तकरीबन 11:30 बजे शहर के प्राचीन काली मंदिर में आरती चल रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस दौरान मंदिर प्रबंध समिति से जुडे़ राकेश मिश्र, मोतीलाल रिछारिया , प्रयागदत्त अवस्थी, प्रमोद अवस्थी, राधेश्याम गुप्ता, बाबूराम गुप्ता व विपिन रिछारिया मंदिर आये और पुजारी तुलसीदास पर हमला बोल दिया। हमलावरों ने पहले तो पुजारी द्वारा कमेटी पर मंदिर के धन गबन का सार्वजनिक आरोप लगाने पर नाराजगी जतायी। सफाई देने पर हमलावर आग बबूला हो गये और पुजारी की धुनाई शुरू कर दी। हमलावरों में मोतीलाल रिछारिया ने उसी समय चाकू से पुजारी की जीभ काट दी। पुजारी बेहोश होकर वहीं गिर गया।

इस घटना से जहां खासी तादाद में उपस्थित श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गयी, औरतें चीखने चिल्लाने लगीं तो शोर-शराबा सुनकर सड़क व आस-पड़ोस के लोग मंदिर में जमा हो गये। आननफानन पुजारी को जिला अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद पुजारी के पिता व मंदिर के पूर्व पुजारी जोगेश्वरानंद सरस्वती भारी भीड़ के साथ कोतवाली पहुंचे और वहां उन्होंने सभी सात हमलावरों के विरुद्ध रिपोर्ट धारा 147, 223 के तहत दर्ज करायी है। विवेचना अलीगंज चौकी इंचार्ज हवलदार सिंह कर रहे है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

उधर भक्तों का कहना है कि 25 वर्ष से मंदिर में आ रहे लाखों रुपये के चढ़ावे व दान को लेकर घटना को अंजाम दिया गया है। कमेटी मंदिर में आय-व्यय का हिसाब नहीं दे रही थी, जिसका खुलासा पुजारी ने लोगों के बीच कर दिया था।

गौरतलब है कि इसी वर्ष 19 जून को भक्तों ने मंदिर कमेटी से चढ़ावे का हिसाब मांगा था। तब कमेटी ने बताया था कि मंदिर के जीर्णोद्धार में 49 लाख रुपये व्यय हो गये हैं उसने सिर्फ 57 रुपये की बचत दिखायी। कमेटी के सदस्यों ने जब भक्तों को बताया कि व्यय का ब्योरा झांसी में रजिस्ट्रार सोसाइटी के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है, तो भक्तों ने रसीद मांगी तो वह नहीं दिखा पाये। पुजारी समेत भक्तों के मन में संशय हुआ कि जब मंदिर का जीर्णोद्धार सर्राफ हीरालाल अग्रवाल ने कराया और मंदिर में कोई धार्मिक आयोजन नहीं हुआ तो पैसा कहां खर्च हो गया। इधर चढ़ावे के पैसे में घपले की बात धीरे-धीरे फैलने लगी। बस इसी से कमेटी के पदाधिकारी पुजारी से खुन्नस खा बैठे थे।