ग्वालियर लाइट रेलवे की बुनियाद माधवराव सिंधिया प्रथम ने 19वीं सदी में डाली थी

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ग्वालियर- सिंधिया रियासत के समय से चली आ रही नैरोगेज रेलवे को यूनेस्कों की हैरिटेज सूची में स्थायी रूप से स्थान मिलने के आसार हैं। फिलहाल इसे अस्थायी सूची में शामिल कर लिया गया है। विश्व की हेरिटेज रेलवे होने पर न केवल इसे यूनेस्को से आर्थिक सहायता मिलने लगेगी, बल्कि ग्वालियर शहर का पर्यटन स्तर बढ़ जाएगा।

मात्र दो फुट गेज वाली इस रेलवे यानी ग्वालियर लाइट रेलवे की बुनियाद माधवराव सिंधिया प्रथम ने 19वीं सदी में डाली थी। उस समय ट्रेन तीन रूटों ग्वालियर से शिवपुरी, भिंड व श्योपुरकलां तक चलती थी। आजादी के बाद भारत सरकार के अधीन हुई यह रेलवे आज भी जिंदा है। कुछ समय पहले यूनेस्को की टीम ने ग्वालियर का दौरा कर इस अजूबी रेल का निरीक्षण किया था। इस मामले में रेलवे बोर्ड ने भी रुचि ली।
यूनेस्को की विश्व विरासत स्थल समिति ने हाल में इसे अस्थायी सूची में शामिल कर लिया। सूची में मंसूरी में रेलवे द्वारा संचालित प्राचीन ओक ग्रोव स्कूल, मुंबई के चर्चगेट स्थित पश्चिम रेलवे मुख्यालय को भी शामिल किया गया है। गौरतलब है कि मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल सहित दार्जिलिंग, नीलगिरी व शिमला रेलवे को यूनेस्को विश्व विरासत (हेरिटेज) का दर्जा पहले ही दे चुका है।

इतिहास देखे तो माधवराव सिंधिया प्रथम ने 1889 से 1925 तक ग्वालियर लाइट रेलवे की तीन ब्रांच लाइनों का विस्तार किया था। इनमें ग्वालियर-शिवपुरी, ग्वालियर-श्योपुरकलां व ग्वालियर भिंड रेल खंड शामिल हैं। उस समय इस पर 97 लाख रुपए की राशि खर्च की गई थी। ग्वालियर से श्योपुरकलां तक रेल लाइन का काम एक जनवरी 1904 से 15 जून 1909 तक चार खंडों में पूरा कराया गया था। इस समय इसी खंड पर ट्रेनें दौड़ रहीं हैं जबकि ग्वालियर-शिवपुरी व ग्वालियर-भिंड की लाइनें ब्राडगेज में तब्दील हो चुकी हैं।आजादी के पहले ग्वालियर लाइट रेलवे ग्रेट इंडियन पेननसुएला रेलवे के अधीन ,एक अप्रैल 1950 से लाइट रेलवे भारत सरकार के अधीन हो गई तथा 5 नवम्बर 1951 को मध्य रेलवे में शामिल हुई। एक मार्च 2003 को उत्तर मध्य रेलवे जोन बनने के बाद इसमें शामिल की गई।

ग्वालियर लाइट रेलवे के प्रथम महाप्रबंधक बी. लारेंस थे। इनका कार्यकाल 1913 से1922 तक रहा। मध्य रेलवे में शामिल होने पर पहले क्षेत्रीय प्रबंधक आरसी त्रिपाठी बने।

ग्वालियर लाइट रेलवे से माधवराव सिंधिया प्रथम शिकार खेलने के लिए जाते थे। उनकी स्पेशल ट्रेन में एक किचन कार, एक रेस्टॉरेंट कार व एक निरीक्षण कार होती थी। वर्तमान में उत्तर मध्य रेलवे के पास 1931 में बनी निरीक्षण कार व 1924 में बनी रेस्टॉरेंट कार मौजूद है।

यूनेस्को की विश्व विरासत स्थल की सूची में ग्वालियर लाइट रेलवे को शामिल करने पर कई फायदे होंगे। वल्र्ड हैरिटेज फंड से करोड़ों रुपए की सहायता मिलेगी। प्राकृतिक आपदा या फिर आपातकालीन स्थिति में भी मदद मिलेगी। मैनेजमेंट प्लान बनाकर मदद की जाएगी और संरक्षण के उपाय बताए जाएंगे। स्थानीय प्रबंधन को यूनेस्को की टीम के विशेषज्ञ आकर तकनीकी प्रशिक्षण देंगे।इससे पर्यटन की गतिविधियों में इजाफा होगा तथा स्थानीय अर्थ व्यवस्था में भी सुधार आएगा।

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