गोवा जाने की होड़ निगम पार्षदों में

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झांसी- नगर निगम में पिछले कुछ दिनों से पार्षदों में गोवा सेमिनार में हिस्सा लेने को लेकर होड़ मची हुई है। एक-दूसरे की टांग खिंचाई और हंगामे के बाद करीब 18 पार्षदों को भाग लेने को हरी झण्डी मिल गई है। पूर्व में कई सेमिनार में हिस्सा लेने के बाद आज तक महानगर में कोई नई योजना लागू न होने से सेमिनार पर उंगलियां उठना शुरू हो गई है।

आल इण्डिया इन्स्टीट्यूट ऑफ लोकल सेल गवर्नमेण्ट द्वारा महानगरों के महापौर और पार्षदों का तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार गोवा में प्रस्तावित है। इसमें भाग लेने को लेकर ज्यादातर पार्षद आतुर है। उसका ही नतीजा है कि पिछले दिनों कुछ पार्षदों ने इसका विरोध दर्ज कराया था, जिस पर नगर आयुक्त ने रद करने की बात कही थी। पार्षदों के दबाव पर नगर आयुक्त ने करीब 18 पार्षदों को सेमिनार में हिस्सा लेने की हरी झण्डी दे दी है। मालूम हो कि इसके पहले भी कुछ पार्षद चण्डीगढ़, मुम्बई, अण्डवार निकोबार, लखनऊ, दिल्ली, भोपाल आदि में हुए सेमिनार में नगर निगम के खर्चे पर भाग ले चुके है। इन सेमिनारों में महानगर में योजनाओं को संचालित करने के प्रक्रिया और आने वाली बाधाओं से निपटने के गुर बताए जाते है। महानगर में लागू हुई योजनाओं पर अगर नजर डाले तो सोलिड वेस्ट को छोड़ दिया जाए, तो कोई भी योजना दिखाई नहीं देती है। प्रश्न यह उठ रहा है कि जब महानगर में कोई योजना लागू नहीं हो रही है, तो ऐसे सेमिनारों में हिस्सा लेने से क्या फायदा! इस सम्बन्ध में महापौर डॉ. बी.लाल ने बताया कि सेमीनार में भाग लेने से योजनाओं के बारे में जानकारी होती है। महानगर में जो सोलिड वेस्ट योजना लागू होने जा रही है वह सेमीनार की ही देन है।

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