गोमूत्र हर रोग के निदान में सक्षम

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जालौन- भारतीय संस्कृति में गौ पूजा का विधान यूं ही नहीं किया गया। गोमूत्र में ऐसी रोग निवारक शक्ति है कि इसे संजीवनी कहा जा सकता है। उदर रोग, चर्म रोग, नेत्र विकार के साथ-साथ इससे सफेद कुष्ठ व हाथी पांव जैसे असाध्य रोगों का भी उपचार संभव है।

भैरव गो सेवा समिति के सचिव विश्वनाथ सिंह लम्बे समय से गौ संरक्षण के अभियान में जुटे हुये है। उन्होंने बताया कि गाय पालने वाले को गुणकारी दुग्ध तो मिलता ही है साथ ही साथ उसे किसी डाक्टर या वैद्य के पास जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि गोमूत्र लगभग हर रोग के निदान में सक्षम है। उन्होंने बताया कि उदर रोग के निवारण के लिये गोमूत्र में सौंधा नमक और राई का चूर्ण मिलाकर पीना चाहिये। आंखों में जलन, कब्ज, शरीर में सुस्ती और अरुचि की शिकायत होने पर शक्कर मिलाकर गोमूत्र पी लें। प्रसूति के बाद स्त्री को सुवा रोग होने पर गोमूत्र दिया जाये तो काफी लाभ मिलता है। सफेद कुष्ठ होने पर बावजी को अच्छी तरह से पीसकर लेप लगायें, कुष्ठ दूर होगा। सुबह खाली पेट गोमूत्र पीने से हाथी पांव रोग का निदान किया जा सकता है। गोमूत्र में पुराना गुड़ और हल्दी का चूर्ण मिलाकर पीने से भी हाथी पांव के साथ-साथ दाद व कुष्ठ रोग का उन्मूलन होता है।

श्री सिंह ने बताया कि टाइफाइड के कारण या किसी भी दवाई के खाने से सिर पर किसी स्थान के बाल उड़ जाते है तो गोमूत्र में तम्बाकू पीसकर डाल दें। दस दिन बाद पेस्ट जैसा बन जाने पर अच्छी तरह रगड़कर बाल झड़े स्थान पर लगायें तो बाल फिर से आ जाते है। इसे सिर में भी लगा सकते है। उन्होंने कहा कि भारत अत्यंत सौभाग्यशाली देश है जिसे गाय व गंगा जैसे बहुमूल्य उपहार कुदरत ने दिये है। यह दुर्भाग्य की बात है कि वर्तमान समाज गाय की ओर से मुंह मोड़ रहा है। दूध निकलना बंद हो जाने के बाद गाय को भूखा छोड़ा जा रहा है। इस तरह की आदतें कलंक है। उन्होंने कहा कि वे अभियान चलाकर गांव-गांव में गोशालायें स्थापित कराने की कोशिश कर रहे है।