गांव में पकेगा गैस पर खाना

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झांसी- केन्द्र सरकार की योजना के तहत दस हजार की आबादी वाले गांव में एक गैस एजेन्सी खोली जायेगी। सूत्रों के अनुसार विभिन्न ऑयल कम्पनियों ने इसके लिए सर्वे का काम शुरू कर दिया है। योजना के तहत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले विशेष रूप से लाभान्वित होंगे।

अब तक गांव के लोग चूल्हा जलाने लकड़ी व मिट्टी के तेल का सबसे अधिक इस्तेमाल करते थे। प्रदेश में बड़े पैमाने पर आयी मिट्टी के तेल की कालाबाजारी की शिकायतों के चलते इस योजना को लाया गया है। सरकार की इस योजना में साफ कहा गया है कि एक ओर जनसंख्या वृद्धि होने से जहां राशनकार्ड धारकों की संख्या बढ़ रही है तो वहीं दूसरी ओर मिट्टी के तेल का संकट भी बढ़ रहा है।

सूत्रों के अनुसार योजना में दस हजार की आबादी वाले गांवों में भी संभावित उपभोक्ताओं की संख्या का निर्धारण किया गया है। योजना में प्रस्तावित उपभोक्ताओं की संख्या 500 से 1000 रखी गयी है। जानकारों का कहना है कि यदि 10 हजार की आबादी पर गैस एजेन्सी खोली जाती है तो एक नहीं कई समस्यायें ऑयल कम्पनियों के सामने आ सकती है। मसलन संयोजनों की संख्या की मांग बढ़ सकती है और योजना निर्धारण से कहीं आगे जा सकती है।

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि ऐसे गांवों में गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले राशन कार्डधारकों को 5 किलो वाला छोटा गैस सिलिण्डर दिया जायेगा और सिलिण्डर की प्रतिभूति राशि के रूप में उसे 300 रुपये जमा करने होंगे। ऐसे राशन कार्डधारकों को 10 रुपये प्रति किलो के हिसाब से गैस देने की बात कही गयी है, जबकि आम उपभोक्ताओं को इस समय 23 रुपये प्रति किलो के हिसाब से गैस मिलती है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले जिन परिवारों को यह गैस की सुविधा दी जायेगी, उन्हे मिट्टी के तेल का वितरण नहीं किया जायेगा।

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