क्लिष्टता के आवरण से मुक्त करे हिंदी को

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उरई-दयानंद वैदिक महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में सोमवार को हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में ‘राष्ट्रभाषा हिंदी दशा और दिशा’ विषय पर संगोष्ठी हुयी जिसकी अध्यक्षता डा. अरुण कुमार प्रवक्ता शिक्षा विभाग ने की।

संगोष्ठी के अवंसर पर राजनीति विज्ञान विभाग के प्रवक्ता डा. आदित्य कुमार ने हिंदी को ग्राह्यं बनाने के लिए उसे क्लिष्टता के आवरण से मुक्त कराने और जन साधारण की सहज भाषा के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। डा. वीरेद्र यादव ने कहा कि भूमंडलीकरण के दौर में हिंदी विश्व बाजार की भाषा के रूप में स्थान बना चुकी है। यदि इस समय दृढ़ संकल्पित होकर हिंदी को राजभाषा का अधिकार दिलाने का काम किया जाये तो आसानी से हो सकता है। डा. नगमा खान ने हिंदी को व्यवहारिक भाषा बनाने का सुझाव दिया। डा. आरएन मानव ने कहा कि हिंदी की बात नेता और बुद्धिजीवी सभी करते है लेकिन जब तक वे स्वयं और अपने बच्चों में हिंदी के प्रति अनुराग जागृत नहीं करेगे तब तक हिंदी की स्थिति नहीं सुधरेगी। डा. अनुज भदौरिया ने एकल काव्य पाठ किया। संचालन डा. राममुरारी चिरवारिया ने किया।