क्या होगा इन बाल श्रमिकों का

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चित्रकूट- अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर मजदूरों की दशा व दिशा पर घड़ियाली आंसू व ओजस्वी विचार व्यक्त कर भविष्य की तमाम योजनायें फिर से बनेगी, परंतु इन सब बातों से बेखबर दो जून की रोटी का जुगाड़ कर रहे बाल श्रमिकों की ओर किसी का ध्यान नहीं है। मुख्यालय की सड़कों में ऐसे बहुत नाबालिग बच्चों को घर परिवार की जिम्मेदारी उठाते देखा जाता है।

रेलवे स्टेशन के पास नाबालिग भाई बहन रिक्शा चलाते देखे जाते है। दोनों मिलकर सवारी बुलाकर बैठाते है। दोनों बारी-बारी से रिक्शा चलाकर पूरे दिन में पचास रुपये की व्यवस्था कर लेते है। वह कहते है कि वह सरकारी स्कूल में पढ़ते है कभी कभार स्कूल भी जाते है, परंतु घर की स्थिति खराब होने से पूरा परिवार मजदूरी करके पैसा कमाता है। दस व ग्यारह वर्ष की आयु वाले दोनों बाल श्रमिकों ने यह भी कहा कि कभी कोई शासकीय सहायता नहीं मिली। उन्हे मालूम भी नहीं मिली।उन्हे बालश्रम अधिनियम की जानकारी नहीं है उन्हे तो घर परिवार के लिये पैसा कमाना अच्छा लगता है।

एक मई को मजदूरों के कल्याण के लिये सरकारी व स्वयंसेवी की संस्थायें तमाम प्रलोभन वाली बातें मंच से करेगी, परंतु इन बाल श्रमिकों का क्या होगा यह कोई नहीं जानता।

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