क्या वाकई प्यार ,सेक्स और धोखा है

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जब से छोटे परदे की महारानी एकता कपूर और दिवाकर बनर्जी की फिल्म प्यार धोखा और सेक्स की बाते शुरू है एक बार फिर से बाज़ार की गर्माहट बढ़ गई है. इस फिल्म का विषय पर लोग चर्चा करने से बचते है और युवा पीढ़ी को कोसना शुरू कर देते है उनकी सारी नैतिकता की दुहाई युवाओ से शुरू होती है और वही ख़तम हो जाती है. और लगे हाथ हम लग जाते है सुचना क्रांति को गरियाने . पर सोचिये क्या समाज मे होने वाली इन घटनाओ के लिए सिर्फ युवा पीढ़ी और नई क्रांति ही जिम्मेदार है. कुछ लोगो का मत है की आज का युवा सिर्फ मस्ती और रोमांच की दुनिया मे जीना चाहता है और सबसे पथ से भटकी हुई है. पर कौन है जो एकता और दिवाकर जैसे लोगो को इन युवाओ के कंधे पर रख कर बंदूक चलाने की इजाजत देते है आप और हम. क्यूंकि इन लोगो को संबंधो का तमाशा बनने मे मज़ा आता है, सेक्स जैसी चीज़ जो निहायत किसी का निजी मामला होता है और आपसी समझ पर आधारित है उसे कुछ लोगो की विकृत मानसिकता का शिकार बनते ज्यादा समय नहीं लगता है. इसका कारण है की शुरू से ही समाज मे लडकियो को सिर्फ उत्पादन की वस्तु समझा जाता है आप किसी भी घर मे देखो आपको मेरी कही बात का सबूत मिल जायेगा परिवार की इज्जत और मर्यादा को निभाने का सबक लड़कियो को घुट्टी की तरह पिलाया जाता है और लड़को को घर के बाहर इधर उधर मुह मरने की खुली छुट होती है उनके लिए अपनी बहन घर की इज्जत और दुसरो की बहन उपयोग की वस्तु. आखिर कौन है इन सब का जन्मदाता, यह दकियानुशी समाज, समाज के ये कथित ठेकेदार और परिवार का बंधन युक्त माहोलजरा सोचिये की आज  अगर परिवार का माहोल बंधन युक्त न हो कर खुशनुमा और दोस्ताना हो तो क्या युवा पीढ़ी घर के बाहर इस तरह छुपे कैमरे की पहुच मे इस तरह से आते रहेंगे. शायद नहीं क्यूंकि तब उन्हें यह पता होगा की परिवार की सुरक्षा और विश्वास उनके साथ है. बाकि सब दिखावा है. अभी तक हमारे ईद गिद अगर कोई घटना होती है तो उसका कसूरवार सिर्फ महिलाओ को बनाया जाता है. भले जुर्म मे लड़का बराबर का भागीदार हो पर उसकी इज्जत पर कभी आंच नहीं आती है. उसकी बदनामी नहीं होती है क्यूंकि वो लड़का अहि हमें इस भेदभाव पर काबू पाना ही होगा वरना एकता और उस जैसे कई और लोग इसे भारतीय समाज का सच बता कर अपनी दूकान चलते रहेंगे और इन घटिया चीजो को देखा कर युवाओ को बरगलाते रहेंगे. हमारे संस्कृति का पतन पश्चिमी विचार धरा से प्रभावित हो कर इतना नहीं होगा जितना इन जैसे लोगो की सोच से होगा. आप जरा यह सोचिये चाहे लड़का हो या लड़की अगर उससे जाने अनजाने कोई गलती होती है तो क्या वो अपने परिवार को बता सकता है नहीं क्यूंकि उसके मन मे यह डर बैठा होता है की उनकी स्वतंत्रा छीन जायेगे और उन्हें बेरियो मे बाँध दिया जायेगा. इस डर से उनका शोषण होता चला जाता है घर के बाहर और भीतर हर स्तर पर जब घर ही शोषण की शुरुआत कर दे तो बाहर क्यों शोषण नहीं होगा. और क्यू कोई mms और कोई video क्लिप नहीं बनेगी. सबसे पहले हमे अपने संस्कारों को मजबूत करना होगा विश्वास की नीव रख कर. तब कोई भी तकनीक कुछ भी बिगाड़ सकती. जरा सोचिये सिर्फ युवा ही नहीं समाज भी क्यूंकि प्यार कभी धोखा नहीं हो सकता है और जहा धोखा हो वोह प्यार नहीं आ सकता है.

Vikas Sharma
bundelkhandlive.com
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