कीमती पानी बेकार बहता है, कर्मचारी सिर्फ देखते है

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चित्रकूट। पानी की किल्लत सभी जगह है। चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों व सिपाहियों को पेयजल उपलब्ध कराने का दावा तो प्रशासन कर रहा है, परंतु वास्तव में अधिकतर पानी बर्बाद हो रहा है। इसका नमूना जल संस्थान के टैकरों के खुले नलों को देखकर लगाया जा सकता है। कर्मचारियों के सामने ही बेकार बह रहे पानी को बचाने की कवायद किसी ने नहीं की। ग्रामीण क्षेत्रों के पोलिंग बूथों पर तो पेयजल की मारामारी होने की संभावना बन गई है।

मुख्यालय से बुधवार को पोलिंग पार्टियां जब रवाना हुई तो प्रत्येक गाड़ी में मौजूद कर्मचारी पानी की बोतल लिये बैठा। सबने कहा कि अपने घर से पानी लाये है, थोड़ा-थोड़ा करके काम चलायेंगे। पता नहीं गांव व बूथ में पानी मिलेगा की नहीं। इधर मुख्यालय के बूथों पर पहुंची पार्टियों व मतदाताओं के लिये पेय जलापूर्ति की चौकस व्यवस्था का दावा जल संस्थान ने किया। खुलेआम टैकरों से बेकार बह रहे पानी से सवाल पर गोल मटोल जवाब देते है।

भीषण गर्मी व उमस में पेयजल संकट से भी निपटना प्रशासन के लिये कड़ी चुनौती बनी है। प्रशासन की हीलाहवाली ही है कि कीमती पानी सड़कों पर बेकार बह रहा है। इस मामले में जल संस्थान अधिशासी अभियंता मनोज आर्य ने कहा कि मुख्यालय के सभी पोलिंग बूथ के करीब 22 टैकरों से पेय जलापूर्ति की जायेगी। चुनाव के मद्देनजर ही सात टैकर महोबा जिले से मंगाये गये है। पेयजल बर्बाद होने के सवाल पर जवाब नहीं दिया। इसके अलावा जल निगम के अधिशासी अभियंता जे पी सिंह कहते है कि सभी ग्रामीण इलाकों के पोलिंग बूथ के आसपास हैडपंप लगे है। चुनाव के लिये ही ग्रामीण क्षेत्रों के 35 हैडपंपों को दुरुस्त कराया गया जबकि मानिकपुर के पवाड़ी पोलिंग बूथ के पास तो नया रिबोर कर हैडपंप लगाया गया।

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