किसानों के मौत चुनने से पहले जिला को सूखाग्रस्त घोषित किया जाय

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ललितपुर- सूखाग्रस्त घोषित नहीं किये जाने से विरोधी दलों व संगठनों में रोष व्याप्त है। बुन्देलखण्ड विकास सेना के कार्यकर्ताओं ने जहा आज सूखाग्रस्त घोषित करने की माग को लेकर मानव श्रृंखला बनाकर शासन विरोधी नारे लगाये, वहीं साहित्यकारों ने भी अपने अंदाज में सूखे से परेशान किसानों को राहत देने की माग की। रचनाओं के माध्यम से मौत चुनने के लिए मजबूर हो चुके किसानों को पहले से मदद देने की आवश्यकता जतायी। उन्होंने मौत के पश्चात राजनैतिक विलाप को अनुचित बताया। जीते जी यदि लाभ मिल जाये तो वही श्रेष्ठ है। इसी तरह अन्य संगठनों ने भी सूखाग्रस्त घोषित करने की माग को लेकर बैठकें कर उत्पन्न स्थिति पर चिंता जतायी।

साहित्यकारों ने सरस साहित्य संगम के बैनर तले सूखा की भयावयता का खाका खींचा। उन्होंने रचनाओं में उदरपूर्ति करने वाले किसानों का दर्द उकेरा। बुन्देलखण्ड विकास सेना जिले को सूखाग्रस्त घोषित कराने के लिए चरणबद्ध आन्दोलन शुरू किये है। इसके तहत आज कार्यकर्ताओं ने जनपद मुख्यालय की प्रमुख सड़क पर मानव श्रृंखला बनाकर शासन के उपेक्षित रवैये पर रोष जताया। उन्होंने कहा कि यदि जिले को शीघ्रता के साथ सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया तो वह उग्र आन्दोलन चलाने के लिए मजबूर हो जायेंगे। इस दौरान कहा गया कि जब प्रदेश में राहत देने की बात आती है तो ललितपुर का नाम सबसे पीछे रहता है। इसी तरह विकास में भी यह सबसे पीछे रहता है। प्रदेश सरकार को ललितपुर के साथ की जा रही उपेक्षा को बंद करना चाहिए। उन्होंने बुन्देलखण्ड में व्याप्त समस्याओं पर रोष जताया तथा कहा कि बुन्देलखण्ड के विकास को अवरुद्ध बनाने में कहीं न कहीं सरकारों का भी उपेक्षित रवैया जिम्मेदार है। बुन्देलखण्ड से उठने वाली माग को राजनैतिक तमगा पहनाने की कोशिश की जाती है। जबकि समस्या को दूर करने के लिए स्थायी प्रयास नहीं किये जाते। उन्होंने कहा कि जिले में सूखे के कारण भयावह स्थिति बनी हुई है, किसानों की फसलें तबाह हो चुकी हैं, राजनीति के गलियारों से ऊपर उठकर मानवता के अंतश में झाक कर आत्महत्याओं एवं पलायन रोकने के लिए कारगर कदम उठाना चाहिए अन्यथा स्थिति को बया करना मुश्किल हो जायेगा।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि वह जिले के किसानों के साथ हो रहे अन्याय को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगे। जब तक जिले को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया जाता तब तक वह आन्दोलन जारी रखेंगे।

इस मौके पर सेना प्रमुख हरीश कपूर, महेन्द्र अगिन्होत्री, सुधेश नायक, के.पी.सिंह, भगत राठौर,आदि मौजूद थे।

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