किसानों की दशा ही देश की दिशा तय करती है

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महोबा- किसान देश की रीढ़ है। कृषि प्रधान देश में किसानों की दशा ही देश की दिशा तय करती है। जहां किसान बदहाल होगा वह राष्ट्र कभी विकसित हो ही नहीं सकता। बुंदेलखंड का किसान कर्ज और सूखे की विभीषिका से जूझ रहा है। आत्महत्याओं का दौर चल रहा है। कंगाली के इस मंजर में किसानों की अपनी एकता ही न्याय दिला सकती है। एकजुटता न होने के कारण सरकारें किसान हितों की अनदेखी करती है।

यह विचार मुख्यालय के एक गेस्ट हाउस में मंडलीय किसान पंचायत को संबोधित करते हुए स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक मुरलीधर राव ने व्यक्त किए।  उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड की वीर भोग्या वसुंधरा आज बूंद-बूंद पानी के लिये तरस रही है। पानी के अभाव ने इलाके की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है। किसान तंगहाली और कंगाली से जूझ रहा है। बावजूद इसके राज्य व केंद्र की सरकारों ने इस विकराल समस्या के समाधान की कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई। आवश्यकता है यहां के किसानों को पर्याप्त सरकारी संरक्षण व ऋण राहत दिये जाने की। किसान नेता ने कहा कि कृषि प्रधान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी कृषि ही होती है। किसान बदहाल है तो देश की खुशहाली की कल्पना कैसे की जा सकती है। उन्होंने पंचायत में मौजूद किसानों से अपील की कि वह एकजुट होकर अपने हक की लड़ाई के लिये आगे आयें। आगाह किया कि कृषि और किसानों से जड़ी योजनाओं में बंदरबांट इसलिये होता है कि इनकी समस्याओं के लिये आवाज उठाने वाला कोई नहीं है। विश्वास दिलाया कि स्वदेशी जागरण मंच कृषक हितों के लिये संघर्ष करने की व्यापक रणनीति बना वृहद आंदोलन छेड़ने की तैयारी कर रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुये पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड के किसानों की बदहाली का अहम कारण शासन व प्रशासन की गलत नीतियां है। किसान हित की तमाम योजनाएं अधिकारियों और बिचौलियों की कमाई का साधन बनी हुई है। कहा कि जरूरत अपने हक के लिये निर्णायक संघर्ष करने की है। रामरतन गुरुदेव ने भी कृषक समस्याओं से जुड़े अपने विचार व्यक्त करते हुये एकजुटता पर बल दिया।