कागजों पर बनी नहर-हर साल रखरखाव

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ललितपुर- लोकसभा चुनाव के मतदान का बहिष्कार कर सुर्खियों में आया विकास खण्ड बार के ग्राम सिमरिया में एक अजूबी घटना सामने आयी है। इस गाव में सिंचाई विभाग ने एक नहर बनायी है लेकिन धरातल पर इस नहर का कोई अता-पता नहीं। सालों पहले महज कागजों में बनी इस नहर का हर साल रखरखाव भी होता है जिस पर हजारों रुपये खर्च हो रहे है। ग्रामीणों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जाच कराये जाने की माग की है।
गौरतलब है कि जिले में सिंचाई विभाग और भूमि संरक्षण विभाग से सिंचाई की तमाम योजनायें संचालित की जाती है। सालों से चल रहीं इन योजनाओं का यदि सही ढग से क्रियान्वयन कराया गया होता तो शायद जिले में खेतों की उत्पादन क्षमता पंजाब से कमतर नहीं होती, लेकिन सिंचाई क्षमता बढ़ाने के नाम पर क्रियान्वित योजनाओं को जमकर पलीता लगाया गया, जिसका उदाहरण कल विकास खण्ड बार अन्तर्गत ग्राम सिमरिया में देखने को मिला। बताया गया है कि कुछ साल पहले गाव में सिंचाई विभाग द्वारा सिमरिया माइनर का निर्माण कराया गया था। बकौल ग्रामीण सड़क के निर्माण कार्य का श्रीगणेश भी हुआ। कुछ दूर तक नहर भी खोदी गयी, लेकिन बाद में नहर की खुदाई का काम बंद कर दिया गया। ग्रामीणों को यही बताया गया कि निर्माण पर रोक लग जाने की वजह से कार्य रोक दिया गया है। इस नहर का निर्माण हो जाने से गाव के अनेक किसानों को सिंचाई की सुविधा मुहैया हो जाती, जिनके खेत सिंचाई के अभाव में बन्जर पड़े हुए है।
ग्रामीणों ने बताया कि कुछ समय बाद उन्हे पता चला कि गाव में नहर भले ही नहीं बनी हो लेकिन कागजों पर नहर का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है। यही नहीं हर साल नहर के रखरखाव का कार्य भी कराया जाता और उस पर हजारों रुपये व्यय हो रहे। ग्रामीण यदि चुनाव का बहिष्कार न करते तो शायद गाव के अवरुद्ध पड़े विकास के साथ-साथ नहर की चोरी पकड़ में न आती। कल जब पत्रकारों का दल गाव में पहुचा तो ग्रामीण अपनी व्यथा सुनाने लगे। सुनते-सुनते पत्रकारों के कान तब खडे़ हो गये जब ग्रामीणों ने बताया कि उनके गाव में बनी नहर चोरी हो गयी। पहले तो पत्रकार कुछ समझ नहीं पाये, लेकिन बाद में जब उन्होंने बताया कि गाव में नहर का निर्माण कार्य हुआ ही नहीं और कागजों में नहर पूर्ण बताकर धन का बंदरबाट कर लिया गया। यह स्थिति अकेले ग्राम सिमरिया की नहीं बल्कि कई और भी गाव है जिनमें नहरों का अता-पता नहीं। जिले की राजनीति ठेकेदारी तक सिमट कर रह गयी, जिसकी वजह से विकास योजनाओं के नाम पर हो रही चोरी सामने नहीं आ पाती बल्कि नेता और अधिकारी टेबिल पर बैठकर यह तय करते है कि किस तरह से विकास योजनाओं को पलीता लगाया जाये।
सिंचाई विभाग की तरह भूमि संरक्षण विभाग का भी भगवान ही मालिक है। सालों से विभाग में न जाने जिले में कितनी बंधी बनवा दीं। यदि पिछले दस सालों का हिसाब देखा जाये तो जिले में अब बंधी बनने लायक भी जगह नहीं शेष बची होगी। इसके बावजूद हर साल करोड़ों रुपये के बंधी निर्माण के प्राक्कलन तैयार कर लिये जाते और निर्माण कार्य करा दिया जाता। बुन्देलखण्ड नव निर्माण सेना ने शासन-प्रशासन से इस मामले की उच्चस्तरीय जाच के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की माग की है, ताकि भविष्य में विकास योजनाओं के नाम पर खिलवाड़ रुक सके