कवियों ने किया झमाझम बारिष का स्वागत

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nvy_6947भोपाल 25 जून – अखिल भारतीय बंुदेलखण्ड साहित्य एवं संस्कृति परिषद के तत्ववाधान मंे ,पावस काव्य संगोष्ठी का आयोजन 38 काजीपुरा-कलाश्री कार्यालय में बंुदेलखण्ड परिषद के स्थापना दिवस और वरिष्ठ कवि कैलाष मड़बैया के 67वें जन्म दिवस पर सम्पन्न हुई। डाॅं.गौरीषंकर गौरीष ने भारत की महिमा पर ओजस्वी गीत पढ़ कर पावस का स्वागत किया तो बयोवृद्ध गीतकार प्रेम सक्सेना ने पावस के सूक्ष्म चित्र खींचते हुये जीवन के आनंद से वर्षा ऋतु को जोड़ा। साधक गीतकार श्री ष्याम बिहारी सक्सेना ने पलाष आदि अपनी कविताओं में जीवन दर्षन की तलाष की। रमेष नंद की गजलों में आधुनिक तेवर उभर कर आये तो डाॅ0 अनिल षर्मा मयंक के व्यगों ने काव्य संध्या को मौसमी प्रिवेष प्रदान किया।श्री अतुल असर की लम्बी रचना ने जादुई प्रभाव छोड़ा तो रमेष जोषी के ष्षेरों में तिलिस्म प्रतिबिम्बित हो रहा था। अंत में कैलाष मड़बैया की गजल-‘हमको उखाडने चले थे खुद उखड़ गये, अपनी ही हरकतों से उजालों में जल गये’ श्रोताओं को भाव विभोर कर गई।श्री एच.एन.राय और श्री जगदीष चंन्द्र नेमा के समीक्षात्मक वक्तव्यों ने साहित्य संगोष्ठी को गहराई के साथ उॅंचाई भी प्रदान की। अंत में डाॅं.गौरीषंकर गौरीष ने आभार ज्ञापन किया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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