करोड़ो से कीमत अरबों में पहुंची, फिर भी नहीं बना रसिन बंधा

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चित्रकूट-नहरों के माध्यम से खेतों में पानी पहुंचाने के उद्देश्य से लगभग एक दशक से बनवाया जा रहा रसिन बांध अभी पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा। बान गंगा नदी में बन रहे इस बांध पर अब आसपास के लोगों ने उंगली उठानी भी शुरू कर दी है। लोगों का आरोप है कि बन रहे बांध में विभाग की सह पर लंबी पहुंच वाले ठेकेदारों द्वारा जमकर धांधली की जा रही है। जिसका खामियाजा आने वाले समय में स्थानीय ग्रामीणों को भुगतना पड़ सकता है। 20ckt21

जिले के रसिन गांव में बानगंगा नदी पर बांध बनाए जाने का कार्य लगभग एक दशक पहले आरम्भ हुआ था। जिसका उद्देश्य था कि चित्रकूट व बांदा जिले के उन गांवों में नहर के द्वारा पानी देना जहां सिंचाई के कोई भी साधन नहीं है और ज्यादातर लोग बारिश के भरोसे ही खेती करते हैं। करोड़ों रुपये की लागत की यह परियोजना आज अरबों रुपये में पहुंच चुकी है। फिर भी काम पूरा होने की स्थिति हाल के वर्षो में नही दिख रही। हां इतना जरूर है कि बांध के कार्य में जुटी सिंचाई निर्माण खण्ड व यूपीपीसीएल के बड़े-बड़े ठेकेदार मानकों को ताक में रख करोड़ों के भुगतान पाने के बाद भी कछुआ गति से काम करवा रहे हैं। इसके अलावा बांध निर्माण कार्य में बानगंगा नदी के पानी को बांधने के लिए बन रही मेन दीवार को बनाने में भी घोटालेबाजी की जा रही है। जो बांध के पानी को रोकने का आधार होगी। लगभग तीन  किलोमीटर क्षेत्रा में बन रहे बंधे के पानी को रोकने में अहम भूमिका निभाने वाली मोटी-मोटी दीवारों की पिचिंग ही घटिया तरीके से बनवाई जा रही है। सूत्रा बताते हैं कि पिचिंग में गुणवत्ता विहीन काली मिट्टी डाली जा रही है। जो बंधे के पास ही गांव के खलोखर व मधवा तालाब से खुदवा कर निर्माण एजेंसी के ठेकेदारों द्वारा मंगवाई जा रही है। लोग बताते हैं कि इसमें ठेकेदारों को कम पैसा देन पड़ता है।  जबकि जानकारों का कहना है कि इसमें उच्चस्तर की काली मिट्टी प्रयोग होनी चाहिए। यदि जानकारों की माने तो कार्यस्थल के पांच किलोमीटर दूर कल्याणपुर क्षेत्रा की काली मिट्टी लगाई जानी थी। जिसकी लागत कार्यस्थल तक लाने में प्रति गाड़ी हजारों में बैठती है। इसी के चलते ठेकेदारों द्वारा आस-पास की घटिया काली मिट्टी का प्रयोग किया जा रहा है।

सूत्र बताते हैं कि रसिन बंधे के निर्माण के समय सिंचाई विभाग के आला अधिकारियों ने क्षेत्र के दर्जनों स्थानों की मिट्टी का परीक्षण किया था। लेकिन उनमें अच्छी कंपैक्टिंग न होने के चलते बांध की मुख्य दीवार के निचले तल में पिचिंग कार्य में ऐसी मिट्टी का प्रयोग वर्जित करते हुए टेण्डरों में अच्छी कंपैक्टिंग वाली काली मिट्टी के उपयोग की हिदायत देते हुए कई स्थान भी चिन्हित किए थे। लेकिन पैसे बनाने की चाह में विभागीय अधिकारियों ने ठेकेदारों को वह मिट्टी उपयोग करने की छूट दे दी जिसमें कंपैक्टिंग या पानी को बांध रखने की क्षमता नहीं है। जिसका खामियाजा भविष्य में बांध शुरू होने पर क्षेत्र के हजारों लोगों को जान देकर भुगतना पड़ सकता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि बंधे के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग करने की शिकायत कई बार उच्चाधिकारियों से की गई है। लेकिन शिकायतों के बाद भी विभागीय अधिकारी कार्रवाई करने के बजाए ठेकेदारों के माध्यम से उन्हीं के ऊपर दबिशें डलवाते हैं क्योंकि बानगंगा नदी में बंधने वाले इस भारी भरकम बंधे में होने वाली कमाई को लोगों की जाने ताक में रख कर डकारने में व्यवधान उत्पन्न हो जाता है। इतना ही नहीं लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य से हो रही अच्छी खासी कमाई के चलते ही बांध का काम इतने दिनों बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। इतना जरूर है कि काम से जुड़े अधिकारी से लेकर ठेकेदार तक मालामाल हो चुके हैं और उसी का नतीजा है कि रसिन बंधे में काम की देखरेख करने व काम पाने के लिए लोग विभागीय अधिकारियों को नीचे से लेकर ऊपर तक बकायदे चढ़ौती के माध्यम से खुश रखते हैं। इसी का परिणाम है कि सैकड़ों बार उच्च स्तरीय जांचों का सामना कर चुके ठेकेदार व विभागीय अधिकारी तथा कार्य की गुणवत्ता को लेकर हमेशा निशाने में रहने वाले यूपीपीसीएल के लोग दीमक की तरह जनता की भलाई के लिए बनाए जाने वाले इस बांध को चाटने में लगे हुए हैं। इस विषय में जब कार्यस्थल में मौजूद यूपीपीसीएल व सिंचाई निर्माण खण्ड के लोगों से बात की गई तो वे कन्नी काटते हुए मामले पर जवाब देने के बजाए वहां से निकल गए। वहीं सिंचाई निर्माण खण्ड के अधिशासी अभियन्ता विनोद कुमार मामले पर बात करने की बाजए हमेशा व्यस्तता बताते हुए कुछ कहने से कतराते रहे हैं।

श्री गोपाल

09839075109