कम पानी वाली फसल बोयें किसान

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चित्रकूट -मंडलीय किसान मेला व गोष्ठी के दूसरे जिलाधिकारी ने  पांच जनपदों से आये किसानों को संबोधित करते हुये कहा कि रबी की फसल में गेंहू के स्थान पर चना, मसूर, राई व अलसी को अधिक से अधिक क्षेत्रफल में उगाकर किसान ज्यादा फायदा कमायें।

जिलाधिकारी ने कहा कि जब पानी की कमी है तो फिर हमें ऐसी फसलों का चुनाव करना चाहिये जिनमें पानी की खपत कम हो। इन फसलों में लागत भी कम होती है। उन्होंने गेंहू की बुवाई के लिए सिर्फ उन क्षेत्रों पर ध्यान देने के लिए कहा जहां पर पानी पर्याप्त मात्रा में है। मुख्य विकास अधिकारी भारत यादव ने कहा कि डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके बेहतर उर्वरक है। संयुक्त कृषि निदेशक एलएस कटियार ने रवी फसल की अगली रणनीति पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि जमीन व पानी की स्थिति को देखकर ही फसल की बोवाई की जानी चाहिये। उप निदेशक मो. आरिफ सिद्दीकी ने कहा कि जिले में जो भी सिंचाई के लिये बांध है उनमें पानी काफी कम है। केवल गुंता बांध में ही पानी है वह भी केवल पन्द्रह दिनों के लिये। इसलिये गेंहू का क्षेत्रफल कम करके दलहनी और तिलहनी फसलों को ही बोया जाये। जिला कृषि अधिकारी एच एन सिंह ने गोदामों में उपलब्ध कीटनाशकों, बीजों व उर्वरकों के बारे में जानकारी दी। भूमि संरक्षण अधिकारी जी पी कुशवाहा ने भूमि संरक्षण के कार्यो को एक सुन्दर जमीनी माडल बताया। तकनीकी चर्चा के दौरान चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय के डा. पीके राठी ने जल प्रबंधन पर प्रकाश डाला तो कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां के डा. विजय सिंह ने बीज उत्पादन के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा की। मंडलीय अभियंता यूपी एग्रो काली चरण ने कृषि यंत्रों के बारे में जानकारी दी। जहां एक तरफ दीवारी नृत्य ने लोगों को लुभाने का काम किया वहीं रात के सत्र में पाठा क्षेत्र की राई व कोलहाई बाहर से आये किसानों का मनोरंजन कर रही है। इस मेले में पांच जिलों के लगभग एक हजार किसान आये हैं। प्रदर्शनी में गेंहू और चने के बीज भी किसानों को बांटे जा रहे हैं। उप कृषि निदेशक बांदा विजय सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां के डा. छोटे सिंह, कृषि वैज्ञानिक डा. जितेन्द्र सिंह आदि ने भी संबोधित किया। इस दौरान भारी संख्या में महिला व पुरुष किसानों की भागीदारी दिखाई दी। यहां पर कृषि विभाग लखनऊ, कृषि विभाग, भूमि संरक्षण, उद्यान, पशु पालन, मत्स्य, वन, जेट्रोफा मिशन, यूपी एग्रो, बीज विकास निगम, स्प्रिंगलर और पम्प सेट कम्पनियों व लघु सिंचाई के भी स्टालों पर भी लोग उमड़ रहे हैं। आर के एजेन्सी के स्टाल पर हैंडपम्प द्वारा पानी निकलता देखने के लिये किसानों में भारी संख्या में उत्सुकता दिखाई दे रही है।