कई वर्षो के बाद भी कुछ ही फीसदी हुआ है रसिन बांध में काम

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घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग करने का आरोप लगाते हैं ग्रामीण जानकारों का कहना धीमी गति से काम होने के कई गुना बढ़ गई है लागत गुणवत्ता विहीन काम होने की बात कह जांच की मांग करते हैं स्थानीय वाशिन्दे

कई वर्ष बीत जाने के बाद अब स्थानीय लोगों को उम्मीद जगी है कि जल्द ही उनको पानी की समस्या से निजात मिलेगी। लेकिन वहीं इनको यह भी आशंका है कि घटिया व मानक के विपरीत बन रहा यह बांध पानी रोकने में कहां तक सक्षम होगा। ग्रामीणों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण निर्माण कार्य में समय-समय पर उच्चाधिकारियों का निरीक्षण अवश्य होना चाहिए। ताकि शासन से मिले धन की बबाZदी न हो और बांध अपने उद्देश्यों में खरा उतर सके।

आपरेशन पोस्ट भरतकूप का इलाका भी पाठा की तरह काफी वषोZं तक दस्यु प्रभावित क्षेत्रा रहा है। इसके बावजूद भी यहां के लोग अपनी मेहनत के बल खेती आदि करते हुए अपनी आजीविका चला रहे हैं। भरतकूप के आस-पास क्षेत्राों में रहने वाले किसानों खेती में सिंचाई आदि करने के लिए पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ता है। उनकी समस्या को देखते हुए शासन ने इसके समीप ही स्थित रसिन गांव में एक बांध का निर्माण करवा नहरों के द्वारा किसानों को पानी उपलब्ध कराने की योजना बनाई। और बांध निर्माण कार्य कराने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग के माध्यमसे यूपीपीसीएल को दी थी। सूत्रा बताते हैं कि वर्ष 2003-04 में इस योजना पर काम शुरू हुआ था। लेकिन शुरू से ही यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने लगी। जिस पर जानकार लोगों के अलावा स्थानीय लोगों ने भी इसकी गुणवत्ता पर उंगली उठाई। लेकिन सम्बंधित लोग अपनी मनमानी से काम कराते रहे। जानकार लोगों का कहना है कि विभागीय लोगों द्वारा इस ओर ध्यान कम दिए जाने के चलते ही आठ साल में मात्रा एक तिहाई काम ही हो सका है। जबकि इसको अब तक बन जाना चाहिए। वहीं लोग सम्बंधित लोगों की कार्यप्रणाली पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहते हैं कि जिस समय यह योजना बनी थी उसके बाद से लगातार निर्माणकार्य मेंलगने वाली सामाग्री की कीमतें आसमान छूती जा रही है। जिसके चलते इसकी लागत भी काफी बढ़ गई है। और यदि जल्द ही इसका काम पूरा नहीं किया गया तो बढ़ी हुई मजदूरी आदि  महंगाई के चलते इसमें लागत से कई गुना खर्चा आएगा। वहीं दूसरी ओर सूत्रा बताते हैं कि इसमें सयम तो लग ही रहा है साथ ही साथ लागत बढ़ी दिखा अधिकारी अपनी जेबें भी भरने में लगे हुए हैं। जबकि बांध के निर्माण में मानक के विपरीत घटिया स्तर का सामान उपयोग किया जा रहा है।  सूत्राों की माने तो नजदीक मौजूद पहाड़ियों से अवैध खनन कर निकाले गए बोल्डरों का ही प्रयोग सालों से बन रहे इस बांध में सम्बंधित लोगों द्वारा किया गया है।   जिसको इन लोगों ने आनन-फानन बांध में लगवा दिया है।  ताकि गाहे-बगाहे पहुंचने वाले उच्चस्तरीय जांच दलों को इन घटिया पत्थरों के बांध में लगाए जाने की भनक न लगे। वहीं कुछ विभागीय  लोग खुद यही बताते हैं कि रसिन बंधे लगाने के लिए उच्च स्तरीय  ग्रेनाइड पत्थर लगाने की  स्वीकृत हुई थी।  लेकिन ठेकेदारों ने सम्बंधित लोगों की मिलीभगत और मौनस्वीकृति के चलते बंधे से आधा किमी दूर स्थित पहाड़िया में वन विभाग की भूमि पर अवैध खनन से निकलवाए गए  पत्थरों का प्रयोग हुआ है। जिससे इसकी गुणवत्ता पर सन्देह होना स्वावभाविक है। वहीं जानकार व स्थानीय लोगों का भी कहना है बंधे के निर्माण में सम्बंधित लोग घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग करते हुए अपनी जेबे भरने में लगे हुए हैं। जिससे इसकी पानी रोकने की क्षमता और गुणवत्ता को लेकर भी ग्रामीणों में आशंका है कि उनके हित के लिए बन रहा यह बांध अपने उद्देश्यों को पूरा कर पाएगा या नहीं। स्थानीय लोग कहते हैं कि कि शासन व प्रशासन के उच्चाधिकारियों को समय-समय पर इस बांध का निरीक्षण करना चाहिए। ताकि इसका निर्माण मानकों के अनुसार हो सके और सरकारी धन भी न बबाZद हो। उधर इस सम्बंध में कार्यदायी संस्था के अधिशासी अभियन्ता से उनके मोबाइल पर बात की गई तो उन्होंने कहा है कि बांध निर्माण का काम शीघ्र ही पूरा हो जाएगा। बांध की गुणवत्ता पूछने पर मीटिंग में व्यस्त होने की बात कहते हुए फोन काट दिया।