औषधि उपवन बन गया मुक्तिधाम

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मुरैना- जनसहयोग से तैयार पोरसा कस्बे का मुक्तिधाम अब औषधि उपवन का स्वरूप ले चुका है। किसी सुसज्जित पार्क से ज्यादा फूलदार-फलदार पौधों के साथ ही औषधीय महत्व के पौधों की एक पूरी श्रंखला लोगों को आनंद देती है। मुक्तिधाम के नाम से ही बिदकने वाले लोग यहां सुबह के वक्त योगा करने और शाम को टहलने जाते हैं। मुक्तिधाम को सत्यम, शिवम और सुंदरम नाम से तीन सेक्टरों में बांटा गया है।

यहां अंतिम संस्कार होता है इस सत्यम सेक्टर में हे-राम, हरि शरणम, ऊ नम: शिवाय और त्रिशूल की आकृतियां तैयार की गई हैं। डा. अनिल गुप्ता द्वारा वर्ष १९९२ में शुरू की गई पहल प्रत्यक्ष व परोक्ष एक हजार से अधिक लोगों व संस्थाओं के सहयोग से मुक्तिधाम मनोहारी बन गया है। मुक्तिधाम में सुबह पांच बजे से पतंजलि योग साधना समिति के सहयोग से योग शिविर का आयोजन किया जाता है।

शिवम सेक्टर में इस समय महाकाल के मंदिर निर्माण जारी हैं इसके अलावा स्नानगृह, सत्संग हाल, पंचवटी में नीम, आम, पीपल, पाखर, वटवृक्ष लगाए गए हैं। फलदार पौधों में शहतूत, अमलतास, जमुनी, आम, अंजीर एवं अशोकवृक्ष शोभा बढ़ा रहे हैं। औषधीय पौधों में नारियल, हरड़, बहेड़ा, आंवला, अमलतास, पत्थर चिट्टा, गिलोय, नीम, कनेर, शंखपुष्पी, सुदर्शन, ग्वारपाठा, शरीफा, धतूरा, गांजा, तुलसीवन, कचनार, रबरप्लांट, हरसिंगार और बेलपत्र के पौधे लगे हैं।

सुंदरम सेक्टर में दो लान महाकाल व महाकाल की दुलारी के नाम से हैं। चार वेदों के नाम से प्रवेश द्वार हैं साथ ही आकर्षक लाइटिंग व पार्किग की व्यवस्था है।