ओला वृष्टि ने उम्मीदों पर पानी फेरा

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सूखे की पीड़ा अभी पूरी तरह से मिट भी नहीं पाई थी कि आज कई ग्रामों में हुई ओला वृष्टि ने अन्नदाता की मेहनत के साथ उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पीड़ित किसानों ने ओलों से भरी ट्राली के साथ कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर क्षति पूर्ति की गुहार की।

मौसम विभाग द्वारा आसमान में बादलों के छाए रहने व छींटे गिरने की भविष्य वाणी के विपरीत आज प्रात: लगभग 7 बजे से वर्षा के साथ कई ग्रामों में ओला वृष्टि हुई। देखते ही देखते खेतों में 4 से 5 सेमी मोटा ओला बिछा दिखाई देने लगा। खेतों में मौजूद किसान व जानवर ओलों की तेज मार से चुटहिल हो गए।

जहा-जहा ओला वृष्टि हुई वहा की फसलें खेतों में बिछ गई क्योंकि रबी की फसल इस समय प्रारम्भिक अवस्था में है। सर्वाधिक क्षति सरसों, असली, राई व दलहनी फसलों को पहुची है। चना, गेहूं की फसल आशिक रूप से प्रभावित हुई। जानकारों का कहना है कि ओलों की मार से जहा प्रारम्भिक अवस्था के पौधों की पत्ती व टहनी को नुकसान पहुचा वहीं 5-6 घण्टे तक मिट्टी में ओलों के पड़े रहने व धीमे-धीमे घुलने से पौधों की जड़ों के सड़ने की सम्भावना प्रबल हो गई है।

ओलों की मार से प्रभावित झासी तहसील के ग्राम डोमागोर, कंचनपुर, नयाखेड़ा, सारमऊ, सारमऊ, अम्बावाय के किसान एक टै्रक्टर ट्राली में ओले भर कर कलेक्ट्रेट पहुचे। उन्होंने ब्लाक प्रमुख बबीना पंजाब सिंह व ब्लाक काग्रेस अध्यक्ष अजय यादव के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। किसानों ने ओलों का आकार दिखाते हुए बताया कि डोमागोर, नया खेड़ा, कंचन पुर में खेतों में ओलों की चार इच की पर्त जमी है। पेड़-पौधों की पत्तिया झड़ चुकी है। फसलों के नष्ट होने से उनके सामने भुखमरी की नौबत आ गई है।

किसानों ने बताया कि पाच वर्षो के सूखा के बाद उन्होंने बड़ी उम्मीदों से खेतों में फसल बोई थी, किन्तु ओलों ने फसल को चौपट कर दिया। उन्होंने जाच कर क्षतिपूर्ति की माग की। जब किसानों को पता चला कि जिलाधिकारी राजशेखर के निर्देश पर उप जिलाधिकारी सदर गावो का दौरा करने गए है तो वह ट्राली में भरे ओलों को कलेक्ट्रेट में ही पलट कर अपने गाव लौट गए। उप जिलाधिकारी ने कई प्रभावित ग्रामों का दौरा कर स्थिति को देखा और ग्रामीणों से वार्ता की। उन्होंने बताया कि ओला वृष्टि से सर्वाधिक सरसों को नुकसान पहुचा है। फसलों की क्षति के आकलन के निर्देश दे दिए गए है। 50 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान होने पर मुआवजा हेतु शासन को लिखा जाएगा। क्षति के आकलन के लिए कृषि विभाग की टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में दौरा करेगी।