एक सप्ताह के भीतर दो बड़े सरदारों सहित पांच डकैतों के मारे जाने से पाठा के लोगों में जगी उम्मीदें

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कहते हैं “प्यार और युद्ध में सब कुछ जायज होता है।´´ कुछ इसी तरह का इरादा लेकर ही पुलिस और एसटीएफ के जवान जिले के पाठा इलाके में दहशत फैला रहे बदमाशों को ठिकाने लगाने में जुटे हुए हैं। अपने अभियान को अंजाम देने के लिए फोर्स हर तरह की रणनीति अपनाते हुए काम कर रही है। जिसके चलते एक सप्ताह के भीतर जिले के दो अन्तर्रप्रान्तीय दस्यु सरदार अपने साथियों सहित मौत के घाट उतार दिए गए। हालांकि इनके सफाए को लेकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाए भी होती रहीं लेकिन आमजन को इससे क्या उसे तो बस यही उम्मीद है कि जल्द ही बाकी बचे बदमाशों को भी ठिकाने लगा दिया जाएगा और उन्हें शान्तिपूर्वक अपना जीवन बिताने का मौका मिलेगा।

गौर तलब है कि उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश की सीमा पर बसा पूरा पाठा इलाका कई दशकों से डकैतों का आतंक झेल रहा हैं। अपने को दस्यु सम्राट घोषित करने वाले अंर्तप्रान्तीय ददुआ के साथ-साथ मुन्नी लाल उर्फ खड़क सिंह, गौरी यादव, ठोकिया उर्फ शंकर पटेल ये कुछ ऐसे कुख्यात नाम हैं जिनके नाम से पूरे जिले के लोग थर्राते थे। इनकी राजनीति में भी अच्छी खासी पैठ थी। जिसके चलते यहां के लोग उसी को अपना नेता बनाते थे जिसके नाम का फरमान ये लोग कर देते थे। लेकिन हवाओं ने अपना रुख बदला और शासन ने इनके प्रति कड़ा रुख अपना लिया। जिसके चलते पाठा सहित पूरे जिले सक्रिय बड़े गैंगों के सफाए के लिए पुलिस फोर्स को मजबूत बनाते हुए यहां स्पेशल टास्क फोर्स की तैनाती की गई। जिसके तहत वर्ष 2007 से इलाके में सक्रिय डकैतों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया गया और एसटीएफ को अपनी बनाई रणनीति के कारण जल्द ही बड़ी सफलता मिली और 22 जुलाई 07 को अन्तर्रप्रान्तीय डकैत ददुआ का सफाया किया गया। उसके ठिकाने लगते ही जैसे डकैतों के दुर्दिन आ गए और ददुआ के मारे जाने के बाद गैंग की कमान सम्भालने वाले उसके दाहिने हाथ राधे व अन्य सदस्यों पर भी पुलिस का दबाव इतना बढ़ा कि राधे ने आत्मसमर्पण करने में ही अपनी भलाई समझी और मप्र के मझगवां थाने में अपने कुछ साथियों सहित सरेण्डर कर दिया। ददुआ अभियान के बाद एसटीएफ ने पुलिस बल के साथ ठोकिया अभियान चलाया और उसे भी मार गिराया गया। जबकि मुन्नी लाल उर्फ खड़क सिंह और गौरी यादव को गिरफ्तार कर जेल के सीखचों के पीछे बन्द करने में पुलिस बल ने सफलता पाई। बड़े बदमाशों और उनके गैंगों के सफाए के बाद लोगों को लगने लगा था कि अब उन्हें डकैतों के आतंक का सामना नहीं करना पडे़गा। लेकिन उनकी यह उम्मीद ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी और एसटीएफ व पुलिस की गतिविधियां धीमी होने के बाद एक बार फिर पाठा में छुटभैया बदमाशों ने बड़े गैंगों के बचे सदस्यों को एकत्रा कर अपना-अपना गैंग बना लिया। जिसमें बिछियन नर संहार में 11 लोगों को ज़िन्दा जला देने के साथ ही दस्यु सुन्दर उर्फ रागिया ने खतरनाक डकैत के रूप में अपनी पहचान बनाई। जिसके बाद से उसके ऊपर डेढ़ लाख का ईनाम घोषित कर दिया गया। इसी के साथ 60 हजार के ईनामी राजा खान उर्फ ओमप्रकाश व 60 हजार के ईनामी राजू कोल ने भी अपने-अपने साथियों सहित क्षेत्रा में दहशत फैलानी शुरू कर दी। अपनी वारदातों को अंजाम देते हुए इन लोगों ने ग्रामीण

इलाकों में हो रहे विकास कार्यों में कमीशन बाजी के साथ-साथ लोगों से चौथ वसूली करनी शुरू कर दी। इन नवोदित गैंगों की चहलकदमी से पाठा का इलाका एक बार फिर थर्राने लगा और यहां सरकारी काम करवा रहे ठेकेदारों ने अपना काम बन्द दिया वहीं दूसरी ओर इस इलाके में चल रही पत्थर की खदाने भी बन्द होने लगी। लोगों को इनसे निजात दिलाने के लिए एक बार फिर एसटीएफ और पुलिस ने कमरकसी और दस्यु विरोधी अभियान छेड़ दिया गया। जिसका नतीजा निकला कि बीती 17 मई को एसटीएफ के हाथों मारकुण्डी थाना क्षेत्रा के मोटवन जंगल में  डी 14 गैंग लीडर 60 हजार का ईनामी राजा खान अपने साथी 22 हजार के ईनामी राहुल पण्डित के साथ मौत के घाट उतार दिया गया। उसको मारे जाने के ठीक छठवें दिन तीसरे नंबर का दुर्दान्त डकैत डी11 गैंग लीडर 60 हजार का ईनामी राजू कोल भी अपने दो साथियों के साथ एक गैंगवार में मऊ थाना क्षेत्रा की बैरहना पहाड़ी में मारा गया।   इन डकैतों का सफाया हो जाने के बाद पाठा के निवासी राहत की सांस लेते हुए कहते हैं उन्हें उम्मीद है कि पुलिस अब जल्द ही बाकी बचे सुन्दर उर्फ रागिया के साथ अन्य बदमाशों को ठिकाने लगा उन्हें सुखचैन से जिन्दगी जीने का मौक देगी।