एक और अन्नदाता ने मौत को गले लगाया

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बुंदेलखंड में सूखे से बदहाल किसानों के आत्मदाह करने का सिलसिला अब थामें नहीं थम रहा है। सरकार के प्रयास और आश्वासन भी किसानों के लिये नाकाफी साबित हो रहे हैं। सूखे की विभीषिका और भुखमरी के मुहाने पर खड़े जलालपुर थाना क्षेत्र के भेड़ी डांडा गांव में एक अधेड़ किसान ने रबी की मुर्झायी फसल देखकर घर में आत्मदाह कर लिया। इस घटना से क्षेत्र में हडक़ंप मच गया।
जानकारी के मुताबिक भूप सिंह (52) पुत्र सेवाराम निवासी भेड़ी डांडा पंद्रह बीघे जमीन पर खेतीबाड़ी करके अपने परिवार का भरण पोषण करता था। उसकी तीन बेटियां है। बड़ी बेटी की शादी उसने किसी तरह की थी। अभी दो बेटियों के हाथ पीले करने के लिये वह खेती किसानी में पसीना बहा रहा था। इस बार काफी जद्दोजहद के बाद उसने गेहूं, चना और मटर की फसल बोयी थी। उम्मीद थी कि फसल का उत्पादन होने पर वह अपनी बेटी का विवाह करेगा। लेकिन, फसल सूखे की चपेट में आकर मुर्झा गयी। पिछले दिनों वह खेत गया और मुर्झायी फसल देखकर खेतों में ही रोने लगा। परिजनों ने उसे समझा बुझाकर शांत कराया। घर के सभी लोग जब बाहर किसी काम से चले गये तो उसने केरोसिन छिडक़र खुद को आग के हवाले कर दिया। वह धू- धूंकर जलने लगा। जानकारी होने पर परिजन घर पहुंचे और झुलसे भूप सिंह को हमीरपुर जिला अस्पताल में भरती कराया। हालत नाजुक होने पर उसे कानपुर रेफर कर दिया गया। कानपुर ले जाते समय किसान ने रास्ते में दम तोड़ दिया। मृतक किसान का राठ में पोस्टमार्टम कराया गया। उसके भाई वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि भूप सिंह ने इलाहाबाद बैंक से पांच लाख रुपये का कर्ज ले रखा था। गांव के साहूकारों से भी उसने इतना ही धन उधार लिया था। इस बार खाद, बीज के लिये साहूकारों के पास उसने कुछ बीघा जमीन गिरवी रखी थी। सूखे की काली छाया पडऩे से भूप सिंह की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया।