एक्सक्लूसिव :दिल्ली से झाँसी की यात्रा लगभग एक घंटे में…..

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अभी हाली में हमारे पडोसी देश ने सबसे तेज़ रफ़्तार की ट्रेन का परिचालन शुरु किया है चीन ने दुनिया की सबसे तेज रेल लिंक सेवा का परिचालन शुरू किय। यह रेल सेवा आधुनिक शहरों को जोडेगी। इस दु्रत गति की रेलगाडी की औसत गति 350 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह ट्रेन हांगकांग के नजदीक चीन के व्यापारिक हब ग्वांगझाओं से राजधानी बीजिंग तक 1069 किलोमीटर का सफर मात्र तीन घंटे में पूरा करेगी। इससे यात्रा के समय में साढे़ सात घंटे से ज्यादा की कमी आएगी। इस रेल लिंक का परीक्षण इसी महीने किया गया था। परीक्षण के समय यह ट्रेन 392 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौडी थी। इस रेल सेवा का परिचालन शुरू हो गया है। यदि तुलना की जाए तो जापान में दुरत गति की ट्रेनों की अधिकतम गति 243 किलोमीटर प्रति घंटे है, जबकि फ्रांस में 277 किलोमीटर प्रति घंटा । इस रेल नेटवर्क के लिए सीमेस, बांबार्डियर तथा अल्सटाम जैसे विदेशी कंपनियों के सहयोग से विकसित टेक्नोलाजी का इस्तेमाल किया जा रहा है।उल्लेखनीय है कि जापान में ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 243 किलोमीटर प्रति घंटा है जबकि जर्मनी में 232 किलोमीटर और फ्रांस में 277 किलोमीटर प्रति घंटा है। भारत में तेज़ रफ़्तार रेलगाड़ियाँ चलाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार हो रहा है. अगर बात करे तो दिल्ली से झाँसी के बीच चीन की तरह 392 किलोमीटर रफ्तार की ट्रेन का परिचालन शुरु किया जाये तो यह दुरी मात्र लगभग एक घंटे में तये की जा सकेगी अभी फिलहाल सिर्फ़ दिल्ली से मथुरा के बीच आंशिक रुप से हाई स्पीड कॉरिडोर चालू है जिस पर लगभग 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से भोपाल शताब्दी रेलगाड़ी चलती है. भारत में हाई स्पीड कॉरिडोर बनाने की कोशिश दो दशक पुरानी है लेकिन आर्थिक और सुरक्षा कारणों से पहले बनी योजनाओं पर अमल नहीं हो सका. ताज़ा प्रगति ये हुई है कि आठ राज्यों, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ने हाई स्पीड कॉरिडोर बनाने के लिए ज़रुरी अध्ययन रिपोर्ट तैयार कराने की पेशकश की है. चीन में तेज़ रफ़्तार की ट्रेन का परिचालन नेटवर्क के लिए सीमेस, बांबार्डियर तथा अल्सटाम जैसे विदेशी कंपनियों के सहयोग से विकसित टेक्नोलाजी का इस्तेमाल किया गया है भारत में ये कम्पनिया आ चुकी है. बुंदेलखंडलाइव डट काम ने इन कम्नियो के अधिकारियो से बात की. हुई बात के मुलाबिक भारत में चीन की तरह इस प्रकार की तेज़ रफ्तार की ट्रेनों का परिचालन सम्भब है इस पर प्रति एक किलोमीटर लगभग पचास करोड़ का खर्च आयेगा और दिल्ली से झाँसी के बीच लगभग बीस हजार करोड़ खर्च की संभाबना हो सकती है यदि ये सम्भब हो सका तो बुंदेलखंड के विकास की सम्भाब्नाये बाद जाएगी

सुधांशु भूसन दूवेदी
bundelkhandlive.com
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